Red Fort Violence: Accused Deep Sidhu sent to judicial custody for 14 days | Red Fort Violence: 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी Deep Sidhu, तिहाड़ जेल में हुई पेशी

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नई दिल्ली: किसानों की ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) के दौरान लाल क़िला हिंसा (Red Fort Violence) मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता-अभिनेता दीप सिद्धू (Deep Sidhu) को दिल्ली (Delhi) की एक अदालत ने मंगलवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. 7 दिनों की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद सिद्धू को आज तिहाड़ जेल में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया.

पुलिस का आरोप है कि वह लाल क़िला पर हुई हिंसा को भड़काने वाले मुख्य लोगों में से एक है. उसकी हिरासत अवधि 16 फरवरी को 7 और दिनों के लिए बढ़ा दी गई थी. पुलिस ने कहा था कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें सिद्धू को कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद देखा जा सकता है. पुलिस ने आरोप लगाया था, ‘वह भीड़ को उकसा रहा था. वह मुख्य दंगाइयों में से एक था. सह-साजिशकर्ताओं की पहचान के लिए कई सोशल मीडिया अकाउंट की जांच करने की जरूरत है. 

‘गलत वक्त पर गलत जगह था सिद्धू’

पुलिस के मुताबिक, सिद्धू झंडा फहराने वाले एक व्यक्ति के साथ बाहर आते और उसे बधाई देते देखा जा सकता है. वह बाहर आया और ऊंची आवाज में भाषण देकर वहां मौजूद भीड़ को उकसाया. वह भड़काने वाले मुख्य लोगों में था. उसने भीड़ को उकसाया जिसकी वजह से हिंसा हुई. हिंसा में कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए. सिद्धू के वकील ने हालांकि दावा किया कि उसका हिंसा से कोई लेना देना नहीं था और वह बस गलत वक्त पर गलत जगह था.

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इन आरोपों में सिद्धू को दर्ज हुआ मुकदमा

गौरतलब है कि सिद्धू को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, जिनमें दंगा (147 और 148) , गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होना (149), हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश (120-बी), लोकसेवक पर हमला या उसके काम में बाधा डालना (152), डकैती (395), गैर इरादतन हत्या (308) और लोकसेवक द्वारा जारी आज्ञा का उल्लंघन (188) शामिल हैं. इसके अलावा सिद्धू पर आर्म्स एक्ट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने संबंधी अधिनियम के साथ ही प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

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क्या है पूरा मामला?

बताते चलें कि केंद्र के 3 नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर 26 जनवरी को किसान संगठनों के आह्वान पर राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैक्टर परेड निकाली गई थी. इस दौरान हजारों किसानों की पुलिसकर्मियों के साथ हिंसक झड़प हुई थी. इसी बीच कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर के साथ लाल क़िला पहुंच गए और स्मारक में घुस गए थे. इसी बीच कुछ लोगों ने लाल क़िला पर चढ़कर धार्मिक झंडा लगा दिया. ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई इस हिंसा में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी.

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