Tuesday, April 23, 2024
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Punjab News In Hindi: Potato Prices Rise In Punjab – नवरात्र आते ही 50 रुपये किलो से भी महंगा बिक रहा आलू, यहां जानें- दाम बढ़ने की वजह

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सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

Updated Sat, 17 Oct 2020 01:38 AM IST

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कई साल से किसान लागत से कम दाम मिलने की वजह से आलू को सड़कों पर फेंक रहे थे। अब यही आलू इस बार मुंह मांगे दाम पर बिक रहा है। नवरात्र शुरू होते ही आलू का मूल्य 50 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा हो गया है। आलू की खपत देखकर इसके भंडारण में भी तेजी आ गई है। 
पंजाब में 2016-17 में 97 हजार हेक्टेयर और 2018-19 में 1.03 लाख हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। 27 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई थी। बंपर पैदावार के कारण किसानों को आलू या तो पांच रुपये प्रति किलो से भी कम दाम पर बेचना पड़ा या मुफ्त में देना पड़ा। साल 2019-20 में 95,790 हेक्टेयर में आलू बोया गया। करीब 20 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई जो पिछले सालों के मुकाबले कम है। आलू की पैदावार कम होने का असर उसके दाम पर भी दिखने लगा है। 

आलू उत्पादक जसविंदर सिंह के मुताबिक पंजाब में उत्पादन का 80 फीसदी आलू बीज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पश्चिम बंगाल और कर्नाटक आलू बीज खरीदने वाले दो सबसे बड़े राज्य हैं। तीन-चार साल से पंजाब का आलू किसान लगातार घाटा उठा रहा था। इस साल कई किसानों ने आलू नहीं बोया। पंजाब में जहां तीन से साढ़े तीन करोड़ आलू के पैकेट का उत्पादन होता था, वहीं इस साल इसमें 20 से 25 फीसदी की कमी आई है। 

उत्पादन कम होने के कारण बढ़े दाम : पवन

आलू के थोक विक्रेता पवन का कहना है कि इस साल आलू के दाम पंजाब में काफी अधिक है। पिछले सालों में आलू पांच से 10 रुपये में मिलता रहा है। इस साल फसल कम हुई है। आलू उत्पादकों की पिछले चार सालों में कमर टूट गई थी। इस साल उन्होंने आलू की फसल से किनारा कर लिया। 

बीज तो तैयार किया गया होगा लेकिन पुखराज, डायमंड शुगर फ्री, ज्योति आलू जो खाने के काम आता है, उसकी पैदावार कम हुई है। इस बार कोरोना का भी असर रहा है। आलू उत्पादक किसान काफी घबरा गए थे कि आलू को स्टोर कैसे करेंगे। लॉकडाउन है सप्लाई कैसे किया जाएगा। गर्मी के कारण आलू खराब होने का भी खतरा था। इस कारण पैदावार कम हुई जिसका असर बाजार में दिख रहा है। नवंबर से नई फसल बाजार में आ जाएगी। इससे दाम कम हो सकते हैं। 

कई साल से किसान लागत से कम दाम मिलने की वजह से आलू को सड़कों पर फेंक रहे थे। अब यही आलू इस बार मुंह मांगे दाम पर बिक रहा है। नवरात्र शुरू होते ही आलू का मूल्य 50 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा हो गया है। आलू की खपत देखकर इसके भंडारण में भी तेजी आ गई है। 

पंजाब में 2016-17 में 97 हजार हेक्टेयर और 2018-19 में 1.03 लाख हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। 27 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई थी। बंपर पैदावार के कारण किसानों को आलू या तो पांच रुपये प्रति किलो से भी कम दाम पर बेचना पड़ा या मुफ्त में देना पड़ा। साल 2019-20 में 95,790 हेक्टेयर में आलू बोया गया। करीब 20 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई जो पिछले सालों के मुकाबले कम है। आलू की पैदावार कम होने का असर उसके दाम पर भी दिखने लगा है। 

आलू उत्पादक जसविंदर सिंह के मुताबिक पंजाब में उत्पादन का 80 फीसदी आलू बीज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पश्चिम बंगाल और कर्नाटक आलू बीज खरीदने वाले दो सबसे बड़े राज्य हैं। तीन-चार साल से पंजाब का आलू किसान लगातार घाटा उठा रहा था। इस साल कई किसानों ने आलू नहीं बोया। पंजाब में जहां तीन से साढ़े तीन करोड़ आलू के पैकेट का उत्पादन होता था, वहीं इस साल इसमें 20 से 25 फीसदी की कमी आई है। 

उत्पादन कम होने के कारण बढ़े दाम : पवन
आलू के थोक विक्रेता पवन का कहना है कि इस साल आलू के दाम पंजाब में काफी अधिक है। पिछले सालों में आलू पांच से 10 रुपये में मिलता रहा है। इस साल फसल कम हुई है। आलू उत्पादकों की पिछले चार सालों में कमर टूट गई थी। इस साल उन्होंने आलू की फसल से किनारा कर लिया। 

बीज तो तैयार किया गया होगा लेकिन पुखराज, डायमंड शुगर फ्री, ज्योति आलू जो खाने के काम आता है, उसकी पैदावार कम हुई है। इस बार कोरोना का भी असर रहा है। आलू उत्पादक किसान काफी घबरा गए थे कि आलू को स्टोर कैसे करेंगे। लॉकडाउन है सप्लाई कैसे किया जाएगा। गर्मी के कारण आलू खराब होने का भी खतरा था। इस कारण पैदावार कम हुई जिसका असर बाजार में दिख रहा है। नवंबर से नई फसल बाजार में आ जाएगी। इससे दाम कम हो सकते हैं। 

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