Prime Minister apprised of internal security situation at DGP conference | DGP कॉन्‍फ्रेंस: PM मोदी ने आंतरिक सुरक्षा की स्थिति का लिया जायजा

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नई दिल्ली: कोरोना काल में डिजिटल माध्यम से हो रहे पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षकों (आईजीपी) के 55वें वार्षिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शिरकत की. इस दौरान उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति से अवगत कराया गया और यह भी बताया गया कि जन अनुकूल कदमों से इसमें कैसे सुधार लाया जा सकता है. 

चार दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन बुधवार को अपने संबोधन में शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर नीतिगत मुद्दों को रेखांकित किया और संकट एवं आपदा प्रबंधन में अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के तौर पर पुलिस की भूमिका की सराहना की. उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. इसके साथ ही शाह ने नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देते आपात स्थिति और आपदाओं से निपटने में पुलिस की क्षमता निर्माण की अहमियत को रेखांकित किया.

शाह ने यह निर्देश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच समन्वित होनी चाहिए और भारत को विकसित एवं सुरक्षित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जाना चाहिए. बयान में बताया गया कि वाम चरमपंथ के खतरे को रोकने के लिए राज्यों के साथ मिलकर समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया. इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान पुलिस की भूमिका एवं पुलिस द्वारा सुरक्षा प्रोटोकॉल को लागू करने पर भी चर्चा हुई.

250 पुलिस अधिकारी सम्मेलन में कर रहे शिरकत
गौरतलब है कि राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के डीजीपी और आईजीपी स्तर के करीब 250 अधिकारी खुफिया ब्यूरो द्वारा डिजिटल तरीके से आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री शाह के कार्यालय ने ट्वीट करते हुए ये जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा, ‘केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन-2020 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया. गृह मंत्री ने डिजिटल तरीके से बहादुर अधिकारियों को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया.’

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कोरोना के कारण पहली बार हुआ सम्मेलन में बदलाव
बताते चलें कि कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों का सम्मेलन पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित हो रहा है. एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 80,000 पुलिसकर्मी और अर्द्धसैन्यकर्मी कोविड-19 से संक्रमित हुए और वायरस से जूझते हुए करीब 650 कर्मियों की जान चली गई. वर्ष 2014 के बाद से डीजीपी और आईजीपी की बैठकों का प्रारूप, आयोजन स्थल, विचार-विमर्श का विषय लगातार बदलते रहा है. वर्ष 2014 के पहले मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर ही विचार-विमर्श किया जाता था.

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2014 के बाद दिल्ली के बाहर होता है सम्मेलन
हर साल डीजीपी और आईजीपी अधिकारियों का सम्मेलन होता है. इसमें राज्यों और केंद्र के अधिकारी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 2014 में सत्ता में आने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी (Delhi) के बाहर इसका आयोजन कर रही है. इससे पहले सम्मेलन गुवाहाटी (Guwahati), गुजरात में कच्छ का रण, हैदराबाद (Hyderabad), मध्यप्रदेश में टेकनपुर (Tekanpur), गुजरात के केवडिया और महाराष्ट्र के पुणे (Pune) में आयोजित हुआ था.

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इन मुद्दों पर हो रही चर्चा
अधिकारियों ने बताया कि आपदा और महामारी के दौरान पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका, साइबर अपराध (Cyber Crime), युवाओं के कट्टरवाद के रास्ते पर जाने जैसे कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अलग-अलग सत्र में आपदा, महामारी, साइबर अपराध, युवाओं के कट्टरता के रास्ते पर जाने और जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद समेत कई अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा. जानकारी के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के वक्ताओं को भी इस सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है. इसमें प्रबंधन (आशीष नंदा), साइबर सुरक्षा (संजय काटकर), आधुनिक विधि विज्ञान (जे एम व्यास), कट्टरवाद विषय पर (मार्क सगेमन, अमेरिका) समेत अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं. 

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