Saturday, February 24, 2024
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Lung infection, chest pain, yet report negative, people doing tests 10 days after getting infected, swab is not detecting virus | फेफड़ों में इन्फेक्शन, छाती में दर्द, फिर भी रिपोर्ट निगेटिव, संक्रमित होने के 10 दिन बाद लोग करवा रहे टेस्ट, स्वैब से नहीं हो रहा वायरस डिटेक्ट

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जालंधर14 मिनट पहले

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  • क्योंकि- गले से पेट में जा रहा वायरस
  • ब्रोंकोस्कोपी से ही हो रही पुष्टि, संक्रमित के संपर्क में आए हैं तो 3 दिन, लक्षण आने पर 5 दिन में कराएं टेस्ट

(प्रभमीत सिंह) कोरोनावायरस के लक्षण बदल रहे हैं। अब छाती में दर्द और फेफड़ों में इन्फेक्शन के काफी मरीज सामने आ रहे हैं। इन मरीजों की कोरोना रिपोर्ट तो निगेटिव आई लेकिन स्कैन में वायरस की पुष्टि हो रही है। चेस्ट स्पेशलिस्ट डाॅ. अरुण वालिया के मुताबिक इसका कारण लोगों द्वारा टेस्ट देरी से करवाना है। गाइडलाइंस के मुताबिक लक्षण आने पर 5 दिन और संक्रमित मरीज के संपर्क में आने पर 3 दिन में टेस्ट करवाना चाहिए। अगर टेस्ट 10 दिन में करवाया जाए तो स्वैब में भी कोरोना की पुष्टि होगी। अब लोग 15 दिन बाद टेस्ट करवा रहे हैं, जिस कारण वायरस गले से होकर पेट में चला जाता है। गले के स्वैब में वायरस डिटेक्ट नहीं होता, इसलिए पुष्टि के लिए मरीज की ब्रोंकोस्कोपी की जरूरत पड़ जाती है।

दूसरी तरफ दिवाली पर चलने वाले पटाखे कोरोना के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। पटाखों में कॉपर, कैडियम, लेड, मैग्नेेशियम, सोडियम, जिंक, नाइट्रेट जैसे रसायन होते हैं, जो ध्वनि प्रदूषण के साथ धुएं से वातावरण को खराब करते हैं। इससे श्वास नली, गुर्दे में इन्फेक्शन, त्वचा संबंधी रोग बढ़ जाते हैं जबकि हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है। वहीं आम लोगों में पटाखों से आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, ब्लड में कोशिकाओं द्वारा ऑक्सीजन अंदर ले जाने की क्षमता कम हो जाती है।

सांस लेने में तकलीफ और खांसी के बढ़ने लगे मरीज
निजी अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ और खांसी के काफी मरीज आ रहे हैं। जब चेस्ट का सीटी स्कैन होता है तो फेफड़ों में आमतौर पर इन्फेक्शन आ रही है, लेकिन आरटी-पीसीआर में पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं हो रही है। ऐसा होने पर कई डॉक्टर मरीज को आगे रेफर कर रहे हैं क्योंकि डॉक्टर जानते हैं कि मरीज की रिपोर्ट निगेटिव है, जबकि उसे संक्रमण हो चुका है। ऐसे में इलाज पर होने वाला खर्च सरकारी हिदायतों में नहीं आता, इसलिए डॉक्टर मरीज को आगे चलता करने में रुचि दिखाते हैं।

मकसूदां यूपीएचसी, जमशेर खास पीएचसी के डाॅक्टरों समेत 85 संक्रमित, एक की मौत

जिले के कोरोनावायरस के 85 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है। इनमें से 22 बाहरी जिलों के हैं। ऐसे में 63 को जिले के आंकड़े में जोड़ा गया है। अब तक जिले में कुल संक्रमितों की गिनती 14333 हो गई है। संक्रमितों में अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर (यूपीएचसी) मकसूदां और प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) जमशेर खास के डाॅक्टरों के अलावा सीआरपी के 2 कर्मी और बीएसएफ कैंप के एक कर्मी शामिल हैं। सेहत विभाग की टीम ने हाईटेक पुलिस नाके पर लोगों की सैंपलिंग की। शनिवार को विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 532 संदिग्ध मरीजों के कोरोनावायरस के रेपिड एंटीजन टेस्ट किए गए हैं।

इनमें से 6 लोगों को कोरोनावायरस की पुष्टि हुई है। आंकड़ों में शहरी क्षेत्रों में 251 लोगों के टेस्ट किए गए, जिनमें से 4 लोगों को संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं देहात के क्षेत्र से 281 टेस्ट किए गए, जिनमें से 2 को संक्रमण निकला। नए 136 लोगों समेत अब तक कुल 13293 लोग ठीक हो चुके हैं। जबकि 588 एक्टिव मरीज हैं। शनिवार को कोरोनावायरस के इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हुई है। इसके साथ ही शुक्रवार को केस फर्टिलिटी रेट 1.37 रही है, जोकि पिछले 3 महीनों में पहली बार दर्ज की गई है। जिले में कुल 452 लोग कोरोना के चलते दम तोड़ चुके हैं।

संक्रमितों और ठीक हो चुके मरीजों के लिए पटाखे खतरनाक

इस बार पटाखे कई लोगों की जान के दुश्मन बन सकते हैं। इसका खतरा एक्टिव कोविड मरीजों के साथ-साथ रिकवर हो चुके मरीजों को भी है। क्योंकि ठीक होने के बावजूद भी शरीर में कोरोना का असर रहता है, जिससे फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। पटाखों से जहरीली गैसें पैदा होती हैं, जो सीधा मरीजों के फेफड़ों पर असर डालती हैं। चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. नरेश बाठला बताते हैं कि करोना के बाद भी कई मरीज छाती में दर्द और अन्य समस्याओं को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। मुख्य कारण फेफड़ों में फाइब्रोसिस होना है। पटाखों से अस्थमा, दिल और ब्लड प्रेशर के मरीजों को खतरा हो सकता है क्योंकि अब तक जितने मरीज सामने आए हैं, वे इनके शिकार रहे हैं।

चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सनीधे का कहना है कि जिन लोगों को कोरोनावायरस का कोई लक्षण नहीं आया, वे भी संक्रमित निकले हैं। ऐसे मरीजों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि उनके फेफड़ों पर इसका असर हो चुका होता है। उनके फेफड़े सही तरह काम नहीं करते।ऐसे में यदि पटाखों का धुआं उठेगा तो उन्हें खासी दिक्कत पेश आएगी।

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