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Free treatment of critical illness haemophilia now in civil, savings of 30 thousand rupees | गंभीर बीमारी हीमोफीलिया का अब सिविल में फ्री इलाज…जिले में 24 मरीज रजिस्टर्ड, टाइप-ए के 20 साल के मरीज को फेक्टर-8 का दिया ट्रीटमेंट


जालंधर10 घंटे पहले

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सिविल अस्पताल में मरीज का इलाज करकते डॉ. भूपिंदर सिंह, डॉ. तरसेम लाल और स्टाफ नर्स उजाला।-भास्कर

सिविल अस्पताल में वीरवार से हीमोफीलिया बीमारी का मुफ्त इलाज शुरू हो गया है। अस्पताल के मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. तरसेम लाल और डॉ. भूपिंदर सिंह ने 20 साल के मरीज को फेक्टर-8 का ट्रीटमेंट दिया। सिविल में इलाज शुरू होने से मरीज की एक बार में करीब 30 हजार रुपए की बचत होगी। इससे पहले अस्पताल के पास 24 मरीजों की रजिस्ट्रेशन थी। इनमें 16 मरीज 18 साल से अधिक और 8 मरीज 18 साल से कम आयु के हैं।

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मेडिकल साइंस में हीमोफीलिया का मुख्य कारण केवल फैमिली डिसऑर्डर ही है। पुरुषों में एक्स क्रोमोसोम कम होने के कारण वे इसके ज्यादा शिकार होते हैं जबकि महिलाएं रोगी होने पर कैरियर स्टेज की मरीज होती हैं। वे अपने बेटे को हीमोफीलिया डिसऑर्डर ट्रांसमिट कर सकती है। वहीं डॉ. तरसेम लाल और डॉ. भूपिंदर सिंह का कहना है कि हीमोफीलिया का इलाज शुरू करने से पहले शरीर के अंदरूनी हिस्से में खून बहने का सही कारण जानने के लिए टेस्ट करना अनिवार्य रहता है। सिविल अस्पताल चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. मनीष सागर का कहना है कि हीमोफीलिया जेनेटिक डिसऑर्डर है।

इसे रोकने के लिए पति-पत्नी शादी से पहले ब्लड टेस्ट करवाकर जांच लें कि उन्हें जेनेटिक ब्लड डिसीज तो नहीं है। बीमारी की कोई उम्र नहीं होती। हो सकता है कि बच्चों में जन्म के बाद इसके लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाएं। बच्चों और बड़ों में इलाज से पहले शरीर के अंदरूनी हिस्से में खून बहने का कारण पता किया जाता है क्योंकि शरीर में प्लेटलेट्स कम होने पर भी शरीर में ब्लड बहना शुरू हो जाता है।



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