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Farmers are becoming a source of inspiration by cultivating stubble without burning | पराली जलाए बिना खेती कर प्रेरणास्रोत बन रहे किसान


बठिंडाएक दिन पहले

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  • प्रदूषण कम करने को आगे आ रहे किसान, शानदार उपज के साथ पर्यावरण का भी कर रहे संरक्षण

धान की पराली को आग लगाने की बजाए विभिन्न तरीकों से कनक की सफल काश्त करने वाले गांव महमा सरजा (कोठे लक्खी जंगल) के किसान जगतार सिंह नौजवान पीढ़ी व किसानों के लिए सफल खेती करने का मार्गदर्शक साबित हो रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट जगतार सिंह 60 एकड़ में खेती करते हैं जिसमें साउनी के मौसम में 60 एकड़ में धान, 10 एकड़ में मिर्च, 2 एकड़ में कपास, 2 एकड़ में चारा व हाड़ी के मौसम में 40 एकड़ में कनक, 17 एकड़ में आलू व 3 एकड़ में चारा की बिजाई करते हैं। जगतार ने पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, जीरो ड्रिल व हैपी सीडर से कनक की बिजाई की ओर प्रति एकड़ में अच्छा झाड़ प्राप्त किया।

वो 5-6 साल से पराली को बिना आग लगाए कनक की बिजाई कर रहे हैं। धान की पराली का बिना आग लगाए स्ट्रा चौपर के बाद हैपी सीडर से कनक की बिजाई की और प्रति एकड़ अधिक झाड़ प्राप्त किया। नौजवान किसान का कहना है कि उसने साल 2018-19 में सुपर वाली कंबाइन से धान की कटाई करके हैपी सीडर से कनक की बिजाई की। इससे जहां समय व खाद का बेवजह का खर्च भी बचाया गया।



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