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Farmer Organizations Meeting Today At Kisan Bhavan In Chandigarh – दिल्ली वार्ता विफल: रेलवे ट्रैक खाली होंगे या नहीं, आज फैसला करेंगे किसान, सियासत भी गरमाई


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Thu, 15 Oct 2020 12:54 AM IST

                    किसान संगठनों की बैठक।
                                <span>- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो) </span>
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दिल्ली वार्ता विफल होने के बाद गुरुवार को किसान भवन चंडीगढ़ में किसान संगठनों की होने वाली बैठक काफी अहम होगी। बैठक में संगठन रेल ट्रैक खोलने या न खोलने पर फैसला लेंगे। दिल्ली में वार्ता विफल होने के बाद किसान यूनियनों में खासा रोष है। दिल्ली में कृषि विभाग के सचिव संजय अग्रवाल से वार्ता विफल होने के बाद चंडीगढ़ में होने वाली किसान यूनियनों की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। 

कृषि कानूनों के विरोध में 21 दिन से रेलवे ट्रैक पर किसान डटे हैं। इसकी वजह से मालगाड़ियों की आवाजाही ठप हो गई है। इस कारण पंजाब में बिजली उत्पादन पर खासा फर्क पड़ा है और लगातार कई जिलों में लंबे कट लगने शुरू हो गए हैं। खाद्यान्न भी नहीं पहुंच पा रहा है। इसका असर आने वाले गेहूं के सीजन पर भी पड़ सकता है। ट्रेनें न चल पाने के कारण तैयार माल पंजाब से बाहर नहीं जा पा रहा है और कच्चा माल पंजाब नहीं आ पा रहा। 

दिल्ली वार्ता विफल होने पर सियासत भी गर्म

सरकार के मंत्री बोले- पंजाब का अपमान हुआ 
दिल्ली में किसानों के साथ केंद्र के व्यवहार पर पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने कड़ी निंदा की है। कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि यह किसानों का नहीं पूरे पंजाब का अपमान है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने वर्चुअल किसानों के साथ वार्ता कर कहा कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार दिखावा कर रही है।

कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि कृषि कानूनों को पास करने से पहले किसानों से कोई वार्ता नहीं की गई। इसके बाद भी अब असंतुष्ट किसान जत्थेबंदियों से बात करने को प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री आगे नहीं आ रहे। पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार अधिकारियों को आगे कर किसानों का सामना करने से भाग रही है। 

इस बात का दूसरा सबूत यह है कि केंद्रीय मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस के द्वारा राज्य के किसानों को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है तो फिर वह किसानों के साथ सीधी बातचीत कर अपनी वाहवाही से क्यों भाग रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक तरफ किसान जत्थेबंदियों को नई दिल्ली में मीटिंग के लिए बुला लिया और दूसरी तरफ उनके केंद्रीय मंत्री मीटिंग से अनुपस्थित रहते हुए वर्चुअल मीटिंग कर रहे हैं। यह पंजाब का अपमान है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है, अब कैबिनेट की तरफ से 19 अक्तूबर को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भी बुला लिया गया है।

किसानों की कद्र नहीं करती केंद्र सरकार: चीमा

आप के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा और प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की कद्र नहीं करती। दिल्ली में किसानों के साथ बैठक का बेनतीजा रहना इस बात का प्रतीक है। मोदी सरकार तानाशाही रवैया अपना कर फैसले को लागू करना चाहती है। मोदी सरकार ने ऐसा करके किसानों का ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब का अपमान किया है। हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि मोदी सरकार की तरफ से देश की किसानी को तबाह करने के लिए पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। जिसे किसी भी कीमत पर आम आदमी पार्टी सफल नहीं होने देगी और न ही बर्दाश्त करेगी।

भाजपा पंजाब में किसानों के मामले में कांग्रेस की भूलों को दोहरा रही है: सुखबीर

शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा किसानों और उनके संगठनों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भाजपा भी पंजाब में किसानों के मामले में कांग्रेस की भूलों को दोहरा रही है। किसानों और नौजवानों को भड़काने के लिए उसी पंजाब विरोधी और किसान विरोधी षड्यंत्रों का सहारा ले रही हैं। 

इससे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में शांति के साथ-साथ देश में स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अकाली दल अध्यक्ष ने मांग की है कि किसानों के खिलाफ सभी ‘काले कानूनों’ को खत्म किया जाना चाहिए और आगे किसान संगठनों से सलाह ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र ने एक बेहद अच्छे अवसर को बेकार कर दिया है। 

दिल्ली वार्ता विफल होने के बाद गुरुवार को किसान भवन चंडीगढ़ में किसान संगठनों की होने वाली बैठक काफी अहम होगी। बैठक में संगठन रेल ट्रैक खोलने या न खोलने पर फैसला लेंगे। दिल्ली में वार्ता विफल होने के बाद किसान यूनियनों में खासा रोष है। दिल्ली में कृषि विभाग के सचिव संजय अग्रवाल से वार्ता विफल होने के बाद चंडीगढ़ में होने वाली किसान यूनियनों की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। 

कृषि कानूनों के विरोध में 21 दिन से रेलवे ट्रैक पर किसान डटे हैं। इसकी वजह से मालगाड़ियों की आवाजाही ठप हो गई है। इस कारण पंजाब में बिजली उत्पादन पर खासा फर्क पड़ा है और लगातार कई जिलों में लंबे कट लगने शुरू हो गए हैं। खाद्यान्न भी नहीं पहुंच पा रहा है। इसका असर आने वाले गेहूं के सीजन पर भी पड़ सकता है। ट्रेनें न चल पाने के कारण तैयार माल पंजाब से बाहर नहीं जा पा रहा है और कच्चा माल पंजाब नहीं आ पा रहा। 

दिल्ली वार्ता विफल होने पर सियासत भी गर्म

सरकार के मंत्री बोले- पंजाब का अपमान हुआ 

दिल्ली में किसानों के साथ केंद्र के व्यवहार पर पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने कड़ी निंदा की है। कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि यह किसानों का नहीं पूरे पंजाब का अपमान है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने वर्चुअल किसानों के साथ वार्ता कर कहा कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार दिखावा कर रही है।

कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि कृषि कानूनों को पास करने से पहले किसानों से कोई वार्ता नहीं की गई। इसके बाद भी अब असंतुष्ट किसान जत्थेबंदियों से बात करने को प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री आगे नहीं आ रहे। पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार अधिकारियों को आगे कर किसानों का सामना करने से भाग रही है। 



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