DNA ANALYSIS Beware of fake news and rumours related to Coronavirus vaccine | Corona Vaccine पर Fake News का संकट, जानिए कैसे बचेंगे अफवाहों से?

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नई दिल्ली: नफ़रत के संक्रमण को समाप्त करने के लिए अभी तक कोई वैक्सीन (Vaccine) नहीं बनी है. लेकिन कोराना वायरस (Coronavirus) के ख़िलाफ़ वैक्सीन जल्द आने वाली है और ये समय रहते लोगों तक पहुंच जाए. इसके लिए भारत में युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. लेकिन कुछ लोग वैक्सीन आने से पहले अफ़वाह की डोज़ आप तक पहुंचाना चाहते हैं और आज हम आपको इस से सावधान करेंगे. लेकिन पहले ये जान लीजिए कि वैक्सीन को लेकर आज का अपडेट क्या है.

वैक्सीन की तैयारियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दूसरी बार सर्वदलीय बैठक हुई. बैठक में वैक्सीन के वितरण, उसके इस्तेमाल, राज्य सरकारों की चिंता और अफ़वाहों को रोकने के विषय पर चर्चा हुई. इस बैठक से जो पांच बड़ी बातें निकलकर आई हैं. वो आपको जान लेनी चाहिए.

-पहली ये कि अगले कुछ हफ़्तों में कोरोना की वैक्सीन तैयार हो सकती है.

-दूसरी बात, वैज्ञानिकों की मंज़ूरी के बाद देशभर में टीकाकरण अभियान शुरू हो सकता है.

-वैक्सीन आने से पहले इसे लेकर कई तरह की अफ़वाहें उड़ाई जा सकती हैं जिसके लिए लोगों को जागरूक होना होगा.

-भारत में 8 वैक्सीन ट्रायल के अलग अलग चरणों में हैं और विदेशों में बन रही वैक्सीन के उत्पादन में भी भारत की अहम भूमिका होगी.

-और आख़िरी बात ये है कि सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुज़ुर्गों को ये वैक्सीन दी जाएगी.

अब हम आपको बताएंगे कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को अफ़वाहों की नज़र कैसे लग सकती है.

सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म्स का भी हो सकता है इस्तेमाल 
सरकार को डर है कि कोरोना की वैक्सीन को लेकर फेक न्यूज और अफवाहें भी फैलाई जा सकती हैं. इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म्स का भी इस्तेमाल हो सकता है. सोशल मीडिया पर अफ़वाहों का संक्रमण बहुत तेज़ी से फैलता है. वाट्सऐप जैसे प्लेटफाॅर्म का इस्तेमाल भी अफ़वाहें फैलाने के लिए किया जा सकता है. भविष्य में कोरोना की वैक्सीन को लेकर कैसे अफ़वाहें उड़ाई जा सकती हैं, वो आपको समझना चाहिए.

 वैक्सीन पर आधिकारिक बयानों के वीडियो को टेक्नोलाॅजी की मदद से ऐसे वीडियो में बदला जा सकता है जिससे लोगों में पैनिक फैल जाए. ऐसे वीडियो को माॅर्फ भी किया जा सकता है या फिर इसके लिए डीप फेक टेक्नोलाॅजी का भी इस्तेमाल हो सकता है. मसलन किसी अधिकारी या मंत्री के वीडियो में बयान को बदला जा सकता है. उदाहरण के लिए किसी अधिकारी की आवाज़ के सैंपल लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अधिकारी की आवाज़ में ही एक झूठा बयान गढ़ा जा सकता है और फिर उस बयान का इस्तेमाल अधिकारी के बोलते हुए चेहरे के साथ किया जा सकता है.

 वैक्सीन पर झूठ और ग़ल़त दावे करने वाले मैसेज
 वैक्सीन पर झूठ और ग़ल़त दावे करने वाले मैसेज वायरल किए जा सकते हैं. इसके ज़रिए लोगों को वैक्सीन के बारे में आधी अधूरी और ग़लत जानकारियां दी जा सकती हैं.

. पुरानी तस्वीरें दिखा कर भी वैक्सीन पर अफ़वाह उड़ाई जा सकती है.

. इसके अलावा विदेशी कम्पनियों को फ़ायदा पहंुचाने की भी कोशिश की जा सकती है. विज्ञापनों या दूसरे माध्यमों से भ्रम फैलाकर ये साबित करने की कोशिश हो सकती है कि उनकी वैक्सीन ज़्यादा बेहतर है.

हम ऐसा क्यों कह रहे हैं इसके लिए आपको कुछ उदाहरण देखने चाहिए.

इंटरपोल ने भी एक रिपोर्ट जारी की
वर्ष 1978 में जब भारत में बड़े पैमाने पर पोलियो का टीका लगाने का काम शुरू हुआ तो एक ख़ास धर्म के लोगों के बीच ये अफ़वाह फैलाई गई कि उनके बच्चे इससे हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएंगे या बीमार पड़ जाएंगे.

इसी तरह की अफ़वाह रोटावायरस के टीकाकरण अभियान के दौरान भी उड़ाई गई थी. तब ऐसा झूठ फैलाया गया कि इस वैक्सीन को लगवाने वाले लोगों की आने वाले नस्ल ख़राब हो जाएगी, जबकि ऐसा कुछ नहीं था.

इसी वर्ष अप्रैल में जब मध्य प्रदेश के इंदौर में स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस की टीम कोरोना टेस्ट करने के लिए पहंुची थी तो कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया था. तब इलाक़े में लोगों के बीच ये अफ़वाह थी कि उन्हें जबरन उनके घर से उठा कर कहीं और बंद कर दिया जाएगा जिससे वो कोरोना का शिकार हो जाएंगे. उस समय कानपुर में भी इसी तरह की अफ़वाह फैल गई थी.

वैक्सीन के नाम पर कैसे कुछ अपराधी दुनिया भर के लोगों को ठग सकते हैं इस पर इंटरपोल ने भी एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि

-वैक्सीन के आने से पहले ही दुनियाभर के आपराधिक संगठन सक्रिय हो सकते हैं.

-इस तरह के अपराधी वैक्सीन की सप्लाई चेंस को भी प्रभावित कर सकते हैं

-फेक वेबसाइट और झूठे दावों के ज़रिए भी आम लोगों को गुमराह किया जा सकता है.

-बाज़ार में कई तरह की नक़ली वैक्सीन भी उतारी जा सकती हैं.

यानी सरकार के लिए करोड़ों लोगों तक असरदार वैक्सीन को पहुंचाना ही एक चुनौती नहीं है, बल्कि अफ़वाहों को बेअसर करना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

गांधी जी के तीन बंदरों से प्रेऱणा लें
वैक्सीन आने के बाद आप कोरोना वायरस से तो बच जाएंगे लेकिन अफवाहों के वायरस से बचने के लिए आपको अपने स्तर पर कुछ प्रयास करने होंगे.  इसका सबसे आसान तरीका है कि आप गांधी जी के तीन बंदरों से प्रेऱणा लें.

यानी कोरोना वैक्सीन पर किसी भी तरह के झूठ और अफ़वाहों के झांसे में न आएं. पहले हर बात की अपने स्तर पर पुष्टि करें. आधिकारिक बयानों से इसका मिलान करें और उसके बाद ही आप किसी संदेश को किसी दूसरे तक फाॅरवर्ड करें. ऐसा करके आप अफ़वाहों के फैलने की चेन तोड़ सकते हैं.

यानी आप वैक्सीन पर ऐसी किसी भी जानकारी को न सुनेंए जो ग़लत हो सकती है. आप अपने कानों पर हाथ रख लें. ऐसा करके आप अफ़वाहों को बिना सुने, उन्हें फैलने से रोक सकते हैं.

गांधीजी का तीसरा बंदर कहता है, बुरा मत बोलो

यानी आपने अगर किसी अफ़वाह के बारे में सुना भी है तो आप उसे आगे किसी और को न बताएं. ऐसा करके आप अफ़वाह को अपने तक ही सीमित रख सकते हैं और उसे फैलने से रोक सकते हैं.

अफ़वाहों से लोगों को बचाने के लिए सरकार भी एक व्यवस्था बना रही 
हालांकि कोरोना वैक्सीन पर अफ़वाहों से लोगों को बचाने के लिए सरकार भी एक व्यवस्था बना रही है. केन्द्र सरकार ने कोविन  (COWIN) नाम का एक डिजिटल प्लेटफाॅर्म बनाने की योजना बनाई है. इस डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर पर लोगों को वैक्सीन से जुड़ी सभी जानकारियाँ मिल सकेंगी. जैसे वैक्सीन किस कम्पनी ने बनाई है? किन लोगों को वैक्सीन पहले लगाई जाएगी? किन इलाकों में टीकाकरण अभियान,  कब शुरू होगा? ये सभी जानकारियां इस डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर आपको आसानी से मिल जाएंगी. इसकी मदद से आप अफ़वाहों को लेकर भी जागरूक हो सकेंगे.

अब आप सोच रहे होंगे कि आप तक वैक्सीन कब पहुंचेगी तो सरकार ने इसके लिए भी योजना बनाई है.

– पहले चरण में 30 करोड़ वैक्सीन लगाई जाएंगी. सबसे पहले एक करोड़ हेल्थ वर्कर्स को कोरोना का टीका लगाया जाएगा.

-फिर दो करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी.

-.और इसी चरण में देश के लगभग 27 करोड़ सीनियर सिटिजन्स को वैक्सीन लगाई जाएगी

यानी जिस वैक्सीन का इंतज़ार बेसब्री से कर रहा है. वो वैक्सीन अगले कुछ हफ़्तों में आ सकती है. हालांकि आपको वैक्सीन के साथ अफ़वाहों पर भी ध्यान रखना होगा.



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