हरियाणा में भाजपा-जजपा की साझा सरकार, दुष्यंत होंगे Dy CM, आज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे मनोहर

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नई दिल्ली। हरियाणा में भाजपा ने बहुमत की कसर महज 11 माह पहले बनी जननायक जनता पार्टी (जजपा) के सहारे पूरी कर ली है। चुनाव नतीजों में 40 पर अटक जाने वाली भाजपा को दस विधायकों वाली जजपा का समर्थन मिल गया और इसके साथ ही बहुमत का जादुई आंकड़ा (46) भी पार हो गया। वैसे भाजपा को गुरुवार को ही छह निर्दलीयों और हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा के समर्थन का आश्वासन मिल गया था। अब जजपा के साथ आ जाने से उसके विधायकों की संख्या 57 हो गई है। हालांकि भाजपा विवादों में घिरे कांडा का समर्थन लेने के प्रति गंभीर नहीं है।

साझा सरकार में मनोहर लाल सीएम होंगे, दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री

समझौते के तहत साझा सरकार में मनोहर लाल सीएम होंगे, जबकि जजपा प्रमुख दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री पद मिलेगा। दोनों दलों के बीच समझौते का एलान गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने देर रात अपने निवास पर दुष्यंत चौटाला के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में किया। इस दौरान दुष्यंत और मनोहर लाल के साथ भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के हरियाणा प्रभारी अनिल जैन और केंद्रीयमंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद थे। शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद दोनों दलों की तरफ से नई सरकार के गठन का दावा पेश किया जाएगा।

आज राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे

मनोहर लाल मुख्यमंत्री ने कहा है कि हरियाणा में स्थिर सरकार देने के लिए भाजपा और जजपा का गठबंधन जरूरी था। शनिवार को हम राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगें। सरकार गठन के लिए दोनों दल शनिवार दोपहर राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। यह समझौता दोनों दलों के लिए अहम है। भाजपा को निर्दलीयों पर निर्भरता कम करने के साथ ही इसके सहारे जाट सियासत को साधने का मौका मिलेगा वहीं जजपा पहली बार चुनावी मैदान में उतरने के बाद सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होगी।

रात से ही तेज हो गया था घटनाक्रम

हरियाणा में नई सरकार बनाने के लिए दिल्ली में गुरुवार रात से ही राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो गया था। गुरुवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुख्यालय में साफ कर दिया था कि सीएम दोबारा मनोहर लाल ही होंगे। शुक्रवार सुबह मनोहर जब चंडीगढ़ से दिल्ली पहुंचे तो निर्दलीय विधायकों ने उनसे अलग-अलग चर्चा की। शाम चार बजे जजपा विधायक दल के नेता दुष्यंत चौटाला अपने निवास पर दैनिक जागरण से खास बातचीत में भाजपा को न्यूनतम साझा एजेंडे के तहत युवाओं को रोजगार और बुजुगरें को बढ़ी हुई पेंशन देने के वायदे के साथ समर्थन देने पर नरम दिखाई दिए।

सरकार बनाने का फार्मूला

नई सरकार में मुख्यमंत्री भाजपा के मनोहर लाल ही होंगे। जजपा के दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बनेंगे और उनके दल के दो विधायक राज्यमंत्री बनेंगे।

हुड्डा ने भी दुष्यंत को दिया था न्योता

दुष्यंत चौटाला ने जब सरकार बनाने के लिए अपना न्यूनतम साझा एजेंडा सामने रखा तो सबसे पहले कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उसे स्वीकार किया। हुड्डा ने दुष्यंत को कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का न्योता भी दिया मगर दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय सिंह ने यह कहते हुए हुड्डा का आमंत्रण खारिज कर दिया कि कांग्रेस के पास विधायकों के नंबर नहीं हैं।

जनसंघ के जमाने से हैं देवीलाल परिवार से रिश्ते

भाजपा और देवीलाल परिवार के बीच राजनीतिक रिश्तों का इतिहास जनसंघ के समय से शुरू होता है। इनेलो का जनाधार सिमटता जा रहा है। दुष्यंत चौटाला की जजपा देवीलाल की विरासत की ध्वजवाहक के रूप में उभरी है। इतिहास की बात करें तो भाजपा देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला को सीएम बनवाने में सहयोगी रही है। बंसीलाल सरकार के गिरने पर 24 जुलाई 1999 को ओमप्रकाश चौटाला भाजपा की मदद से ही सीएम बने थे। कारगिल युद्ध के बाद का लोकसभा चुनाव और उसी साल 1999 का विधानसभा चुनाव इनेलो व भाजपा ने मिलकर लड़ा था। चौटाला ने रोहतक में मेडिकल मोड़ पर देवीलाल और जनसंघ-भाजपा के दिग्गज मंगलसेन की प्रतिमाएं भी लगवाई थीं।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम

-बेरोजगार युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं। पहले ही वर्ष में सभी सरकारी विभागों में रिक्त पद भरे जाएंगे।

-बुजुगों की पेंशन सरकार गठन के पहले महीने में ही बढ़ी हुई दर से दी जाए।

गठबंधन के फायदे

-राज्य को स्थायी सरकार मिलेगी-सरकार निर्दलीय विधायकों के ऊपर निर्भर नहीं रह सकेगी।

-मंत्रिपरिषद में शामिल मंत्रियों में जातीय संतुलन रखा जा सकेगा-जाट और गैर-जाट के बीच समन्वय स्थापित हो सकेगा।

लेकिन चुनौतियां भी रहेंगी

-सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता कायम रखना एक अहम काम होगा।

-जजपा के मंत्रियों को विभाग बंटवारे में हो सकता है मतभेद।

-भाजपा और जजपा के मंत्रियों के बीच समन्वय बनाने में आ सकती है कठिनाई

-अनुशासन का प्रश्न आ सकता है। जजपा राजनीति में अभी नवोदित है। उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं का रुख अहम होगा।

निर्दलीयों की भूमिका

-जजपा के गठबंधन के साथ सरकार बनने के बाद नई सरकार पर निर्दलीयों का कोई दबाव नहीं रहेगा।

संख्या बल का खेल

भाजपा-40, जजपा-10, निर्दलीय-7 कुल 57 विधायक, बहुमत के लिए जरूरी 46 विधायक।

कोट्स

मतदाताओं के आदेश को मानते हुए हमने भाजपा और जजपा की साझा सरकार बनाने का फैसला किया है। यह गठबंधन लोगों की इच्छाओं के अनुरूप है-अमित शाह, अध्यक्ष भाजपा।

रियाणा में एक स्थायी सरकार देने के लिए भाजपा और जजपा का साथ आना महत्वपूर्ण है-दुष्यंत चौटाला, जजपा संयोजक।

स्थिर सरकार देने के लिए भाजपा और जजपा का गठबंधन जरूरी था। शनिवार को हम राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगें-मनोहर लाल, मुख्यमंत्री।