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Anticipatory Bail Petition Of Accused Of Drug Trafficking And Giving Military Confidential Information To Pak Has Rejected – जवान शहीद हो रहे, गद्दारी के आरोपी मांग रहे जमानत, इनके लिए रहम नहीं: हाईकोर्ट


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Wed, 14 Oct 2020 11:17 PM IST

                    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
                                <span>- फोटो : amar ujala </span>
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ड्रग तस्करी और सेना की गोपनीय जानकारी दुश्मन को सौंपने के आरोपियों की जमानत याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं और इस तरह के लोग अदालत से रहम की उम्मीद रखते हैं, जिसके वे हकदार नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि देश की सीमाओं पर तनाव का दौर है और जवान देश की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाकर डटे हुए हैं। वहीं, इस दौर में ऐसे भी कुछ लोग हैं जो चंद पैसों के लिए अपने ही देश के खिलाफ काम करने से गुरेज नहीं कर रहे। न केवल नशीली दवाओं के माध्यम से देश को खोखला कर रहे हैं, बल्कि सेना से जुड़ी गुप्त जानकारियां भी दुश्मन देशों तक पहुंचा रहे हैं।

अमृतसर निवासी गुरलाल सिंह, गुरप्रीत कौर और हरप्रीत सिंह ने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। भारतीय सेना में सिपाही के तौर पर काम करने वाले मलकीत सिंह के बयान के आधार पर तीनों के खिलाफ गत वर्ष आठ मई को अमृतसर ग्रामीण में एफआईआर दर्ज की गई थी। 

सभी आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से पाकिस्तान में एजेंटों से संपर्क करते थे। उन्होंने भारतीय सेना की गतिविधियों के बारे में पाक को गुप्त जानकारी दी। सेना को नुकसान पहुंचाने के लिए सेना की आंतरिक सुरक्षा के संबंध में तस्वीरें, साइट योजना, प्रशिक्षण मैनुअल जानकारी दी। इसके बाद तीनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की थी। 

अदालत में बहस के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि सह अभियुक्त मलकीत सिंह उर्फ फौजी के साथ सभी आरोपी साजिश में पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ मिले हुए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इनकी दी गई जानकारियों के कारण कई जवानों को जान गंवानी पड़ी है और ऐसे में ये किसी भी प्रकार के रहम के हकदार नहीं हैं।

ड्रग तस्करी और सेना की गोपनीय जानकारी दुश्मन को सौंपने के आरोपियों की जमानत याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं और इस तरह के लोग अदालत से रहम की उम्मीद रखते हैं, जिसके वे हकदार नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि देश की सीमाओं पर तनाव का दौर है और जवान देश की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाकर डटे हुए हैं। वहीं, इस दौर में ऐसे भी कुछ लोग हैं जो चंद पैसों के लिए अपने ही देश के खिलाफ काम करने से गुरेज नहीं कर रहे। न केवल नशीली दवाओं के माध्यम से देश को खोखला कर रहे हैं, बल्कि सेना से जुड़ी गुप्त जानकारियां भी दुश्मन देशों तक पहुंचा रहे हैं।

अमृतसर निवासी गुरलाल सिंह, गुरप्रीत कौर और हरप्रीत सिंह ने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। भारतीय सेना में सिपाही के तौर पर काम करने वाले मलकीत सिंह के बयान के आधार पर तीनों के खिलाफ गत वर्ष आठ मई को अमृतसर ग्रामीण में एफआईआर दर्ज की गई थी। 

सभी आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से पाकिस्तान में एजेंटों से संपर्क करते थे। उन्होंने भारतीय सेना की गतिविधियों के बारे में पाक को गुप्त जानकारी दी। सेना को नुकसान पहुंचाने के लिए सेना की आंतरिक सुरक्षा के संबंध में तस्वीरें, साइट योजना, प्रशिक्षण मैनुअल जानकारी दी। इसके बाद तीनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की थी। 

अदालत में बहस के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि सह अभियुक्त मलकीत सिंह उर्फ फौजी के साथ सभी आरोपी साजिश में पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ मिले हुए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इनकी दी गई जानकारियों के कारण कई जवानों को जान गंवानी पड़ी है और ऐसे में ये किसी भी प्रकार के रहम के हकदार नहीं हैं।



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