6 to 7 variants of Coronavirus have been seen in India since March: CSIR Director | भारत में मिल चुके हैं Coronavirus के 6-7 वेरिएंट, CSIR डायरेक्टर ने किया बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली: ब्रिटेन में कोरोना वायरस (Coronavirus) का नया वेरिएंट मिलने से पूरी दुनिया में तहलका मचा हुआ है. कई देशों ने इसी वजह से ब्रिटेन (Britain) से आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर कुछ समय के लिए पाबंदी लगा दी है. भारत में भी मार्च से अब तक कोरोना के 6 से 7 तरह के वेरिएंट देखे जा चुके हैं. हालांकि ज्यादा म्युटेंट होने की वजह से ये वेरिएंट कुछ ही महीनों में खत्म हो गए थे.

दिल्ली के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के डायरेक्टर शेखर मांडे ने बताया कि वायरस का म्युटेट होना एक जनरल प्रोसेस है. भारत में मार्च से अब तक भारत मे कोरोना के 6-7 नए स्ट्रेन मिल चुके हैं. इन सभी स्ट्रेन का ओरिजिन भारत के बाहर हुआ था. मार्च में D614G नाम के कोरोना के सुपर स्प्रेडर वेरिएंट ने भारत में दस्तक दी थी. लेकिन ये वायरस इतना ज्यादा म्युटेट हुआ था कि भारत में जून आते-आते ये वायरस का स्ट्रेन खत्म हो गया था और दूसरा स्ट्रेन आ गया था.

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वैक्सीन मिलने के बाद स्ट्रेन का नहीं होगा असर

मांडे ने ब्रिटेन में मिले नए स्ट्रेन का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीन मिलने के बाद भारत में इस स्ट्रेन का कोई असर नहीं दिखेगा. CSIR की दिल्ली और हैदराबाद स्थित लेब में नए स्ट्रेन से सस्पेक्टेड कोरोना संक्रमित लोगों की लगातार सिक्वेंसिंग टेस्टिंग चल रही है. लेकिन राहत की बात है कि अभी तक ब्रिटेन में मिले स्ट्रेन का एक भी केस अभी सामने नहीं आया है.

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स्ट्रेन के मद्देनजर भारत में शुरू हुई जीनोम सिक्वेंसिंग

गौरतलब है कि भारत में जीनोम सिक्वेंसिंग की दर अभी भी दूसरे देशों से काफी कम है. जीनोम सिक्वेंसिंग का ग्लोबल डेटा जारी करने वाली वैश्विक संस्था GISAID की मानें तो भारत में फिलहाल टेस्टिंग की दर मात्र 0.04 % है. अब तक 1 करोड़ से ऊपर कोरोना संक्रमित केसों में मात्र 4 हजार 238 लोगों के ही सेंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग हुई है. जबकि ब्रिटेन में जीनोम सेकुनसिंग की दर 6 प्रतिशत से भी ज्यादा है. ब्रिटेन में कुल 22 लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमित केसों में 1 लाख 35 हजार से ज्यादा संक्रमित लोगों की जीनोम सिक्वेंसिंग हो चुकी है.

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भारत में 3 वैक्सीन को अप्रूवल का इंजतार

भारत में फिलहाल 3 वैक्सीन DCGI से अप्रूवल मिलने का इंतजार कर रही है. लेकिन नए वेरिएंट पर वैक्सीन और दवा के असर के होने पर लोगों के कई सवाल हैं. इन सवालों का जवाब देते हुए नोएडा के अमर हॉस्पिटल के डॉ शक्ति गोयल का कहना है ब्रिटेन में मिले नए वेरिएंट में प्रोटीन स्पाइक पर बदलाव हुआ है. कोरोना की कुछ वैक्सीन को अगर छोड़ दें तो बाकी सभी वैक्सीन वैक्सीन वायरस के जीनोम पर अटैक करके वायरस को कमजोर करती हैं. और संक्रमण को रोकती हैं. इन वैक्सीन्स ने क्लीनिकल ट्रायल में भी काफी अच्छे नतीजे दिए थे. इसी लिए नए वेरिएंट को लेकर लोगों को बिल्कुल भी पैनिक होने की जरूरत नहीं है.

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