हयात बौमेदीन समेत 14 लोगों को सहयोग देने के जुर्म में उम्रकैद

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फ़्रांस की अदालत ने चार्ली हेब्दो पर हमले में शामिल 14 लोगों को सुनाई उम्रकैद की सजा (फोटो- AP)

फ़्रांस की अदालत ने चार्ली हेब्दो पर हमले में शामिल 14 लोगों को सुनाई उम्रकैद की सजा (फोटो- AP)

Charlie Hebdo attacks: फ्रांस की पत्रिका चार्ली हेब्दो पर हुए आतंकी हमले से जुड़े मामले में 14 लोगों को दोषी मानकर उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. हमलावरों में शामिल कौलीबाली की पत्नी बौमेदीन को भी 30 साल की सजा सुनाई गई है, हालांकि वह अभी फरार है.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 17, 2020, 7:23 AM IST

पेरिस. फ्रांस (France) में चार्ली हेब्दो पत्रिका (Charlie Hebdo attacks) कार्यालय और सुपरमार्केट पर हुए आतंकी हमले से जुड़े मामलों में फ्रांस की एक अदालत बुधवार को 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने इन 14 लोगों को आतंकी घटना को अंजाम देने वाले लोगों की सहायता करने का दोषी पाया है. हमलावरों में से एक अहमदी कौलीबाली की पत्नी बौमेदीन को भी अदालत ने साक्ष्य छुपाने और पति की इस कृत्य में मदद करने के लिए 30 साल की सजा सुनाई है.

AFP चार्ली हेब्दो आतंकी हमले से जुड़े तीन आरोपी अभी फरार हैं. न्यायाधीश ने बौमेदीन को आतंकियों की आर्थिक मदद करने और आपराधिक कृत्य में मदद का दोषी मानते हुए 30 साल की कैद की सजा सुनाई है. इन हमलों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन अल कायदा और इस्लामिक स्टेट ने ली थी. आतंकी हमले सात जनवरी, 2015 में हुए थे. इन हमलों में कई पत्रकारों समेत 17 लोग मारे गए थे.

पत्रिका द्वारा पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापे जाने से गुस्साए भाइयों- सैद और शेरिफ काउची ने पेरिस स्थित चार्ली हेब्दो के कार्यालय में घुसकर गोलियां बरसाई थीं. तीसरे हमलावर अमेदी कौलीबाली ने एक महिला पुलिसकर्मी की हत्या की थी और कोशर सुपरमार्केट में घुसकर चार यहूदियों को बंधक बनाकर उन्हें मार डाला था. बाद में सैद, काउची और कौलीबाली पुलिस कार्रवाई में मारे गए.

मोस्ट वांटेड है बौमेदीन
बता दें कि जिन 14 लोगों को दोषी माना गया है उनमें हयात बौमेदीन (32) भी शामिल है. वह फिलहाल फरार है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह अभी जिंदा है. उसके खिलाफ इंटरनेशनल वारंट जारी हो चुका है. जांचकर्ताओं ने उसे इस्लामिक स्टेट प्रिंसेस का नाम दिया है. न्यायाधीश ने कहा, हमलावर आतंकियों का उद्देश्य पश्चिमी देशों के लिए भय पैदा करना था. उन्‍होंने यह भी कहा कि बिना सहयोग के अपराध संभव नहीं था.

लंबी जांच के बाद आरोपियों को दोषी माना गया है. मामलों में छह आरोपी कम गंभीर अपराधों के दोषी पाए गए. इसलिए उनके खिलाफ आतंकवाद से संबंधित आरोप वापस ले लिए गए. सुनवाई के दौरान चार्ली हेब्दो पत्रिका के पत्रकारों ने भी गवाही दी. सिमोन फिसी नामक एक गवाह ने अदालत को बताया था कि आतंकी दफ्तर में घुसते ही गोली चलाने लगे थे. आतंकी एक धर्म विशेष को लेकर नारे भी लगा रहे थे. उसके गले में गोली लगी और वह बेहोश होकर गिर पड़ा. यदि वह बेहोश नहीं हुआ तो उसकी जान नहीं बचती.

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