रिश्वत लेकर काम कराने के आरोप में उपभोक्ता मंत्रालय के कई अधिकारी सीबीआइ के निशाने पर

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नई दिल्ली। रिश्वत लेकर काम कराने के आरोप में उपभोक्ता मामले के मंत्रालय कई अधिकारी सीबीआइ के निशाने पर हैं। पिछले शुक्रवार को सीबीआइ ने इस मामले में एक एफआइआर दर्ज किया था, जिसमें उपभोक्ता मामले के मंत्रालय का एक अधिकारी को भी नामजद आरोपी बनाया है। मंत्रालय ने रिश्वत लेकर काम कराने वाले रैकेट की सरगना दिल्ली के कैलाश कालोनी के संतनगर की रहने वाली मोनिका गिल को बताया जा रहा है।
लाइसेंस दिलाने के एवज में मोनिका गिल ने की थी लाखों की मांग
सीबीआइ के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों मोनिका गिल द्वारा लाखों रुपये लेकर आंध्र प्रदेश के दो लोगों का काम करने की जानकारी मिली थी। जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि मोनिका गिल ने उपभोक्ता मामले के मंत्रालय के तहत आने वाले बाट माप तौल विभाग से एक लाइसेंस दिलाने के एवज में आंध्र प्रदेश के रामचंद्र राव सरीकी से 70 लाख रुपये की मांग की थी। इनमें से आठ लाख 19 हजार 850 रुपये सरीकी ने मोनिका गिल के बैंक एकाउंट में ट्रांसफर किये। इनमें से एक लाख रूपये मोनिका गिल ने अरुण कुमार सिंह के एकाउंट में ट्रांसफर किये थे। इस सबूत के आधार सीबीआइ ने मोनिका गिल और अरुण कुमार सिंह के साथ रिश्वत देने वाले आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
मोनिका गिल का रैकेट कई मंत्रालयों में फैला
वहीं सीबीआइ का मानना है कि मोनिका गिल की भूमिका सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ता मंत्रालय के अन्य अधिकारियों के साथ वह संपर्क में थी और दलाली लेकर निजी लोगों का काम कराती थी। आशंका यह भी है कि मोनिका गिल का रैकेट कई मंत्रालयों में फैला हो सकता है।
पूरे मामले की गहराई से जांच
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और मोनिका गिल के साथ संपर्क में रहने वाले अधिकारियों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों का पता चलने के बाद मोनिका गिल के साथ लेन-देन या उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी।