ये कैसा प्यार

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राजबीर ने अपनी शादी आपनी मर्ज़ी से निकिता से की।निकिता बिन मां बाप की लड्की थी सिर्फ उसका एक भाई था।राजबीर निकिता से प्रेम करता था उसने अपने घरवालों को ज़िद से मनाकर निकिता का रिश्ता मांग कर लिया था। निकिता भी बेहद खुश थी।राजबीर भी एक बहन का अकेला भाई था।सारा परिवार बेहद खुश था जिंदगी इससे बेहतर नही हो सकती थी।एक साल बाद निकिता ने एक बेटे को जन्म दिया और कुछ देर बाद एक बेटी हुई।सब बढिया चल रहा था लेकिन निकिता की जिंदगी मे एक तूफान आना बाकी था।अपने चेहरे पर शराफत और प्यार का लबादा ओढ़े राजबीर का यह चेहरा भी सामने आयेगा निकिता ने कभी सोचा न था।जिस्मो की भूख आदमी को शैतान बना देती है लेकिन राजबीर की यह भूख कुछ अलग सी थी।शादी के पांच सालों बाद राजबीर को नया चस्का लगने लगा था।फेसबुक इतियादी सोशल साइटस का दुरुपयोग करने मे माहिर राजबीर अपनी जैसी भूख वाले जोड़ो की तलाश करने लगा। वह पहले ऐसे जोडो को ढूँढ़ता जो अपनी पत्नी की उससे बात करवाये और बदले मे राजबीर निकिता पर दवाब बनाता के वो भी उस पुरुष से बात करे।शुरु मे बातचीत से आगे बढते ये बातें आलिंगन और गंदी बातों तक पहुंचने लगीं।निकिता ने कभी सोचा ना था के राजबीर उसे इस दलदल मे घसीटेगा।निकिता राजबीर से बेहद प्यार करती थी इसलिये वो राजबीर को मना न कर पाती पर बात हद से बध्ने लगी। बातचीत से ज़्यादा जिस्मो की नुमायश पर ज़्यादा ज़ोर आने लगा।
फिर उसने मिलने का कार्यकर्म बनाना शुरु किया।निकिता इसका विरोध करती तो राजबीर उसे मना लेता।अपनी बहन को जीन्स तक न पहनने देने वाला राजबीर निकिता जिसको वह अपनी जान से ज़्यादा प्यार करता था उसके कपडे दूसरों के सामने उतार रहा था। ये सब कहने और सुनने मे बर्दाश्त से बाहर है तो निकिता की हालत क्या होती होगी मैं अन्दाज़ा भी नही लगा सकता।निकिता खामोश हो गई।वो अंदर से टूट चुकी थी।वो अब पथर की तरह थी।शायद राजबीर ने उसकी खामोशी को सहमती समझ लिया और उसे अब बाहर दूसरों से मिलने के लिये ले जाने लगा।कभी दिल्ली कभी मुंबई कभी जयपुर।अंदर से मर चुकी निकिता का एक दिन सब्र का बान्ध टूट गया और वो सब को छोड कर भाग गई।वो सब छोडकर जाना चाह्ती थी शायद दुनिया भी।घर से निकलते वह बस यही बुदबुदाती जा रही थी की ये कैसा प्यार है जिसमे एक तरफ तो राजबीर उससे बेहद प्यार करता है और दूसरी तरफ उसे एक वैश्या की तरह इस्तेमाल करता है।

संजीव बांसल