भविष्य की योजना बनाने में जुटा चीन

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साल 2020 चीन की 13वीं पंचवर्षीय योजना का अंतिम साल है, और अगले साल से राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास की 14वीं पंचवर्षीय (साल 2021 से 2025 तक) योजना शुरू होगी। हाल ही में, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं केंद्रीय समिति के पांचवें पूर्णाधिवेशन में 14वीं पंचवर्षीय योजना और 2035 तक के दीर्घकालिक उद्देश्यों पर चर्चा की गई।
पश्चिमी राजनेता और अर्थशास्त्री अक्सर चीन की पंचवर्षीय योजना प्रणाली का मखौल उड़ाते हैं, और यह दावा करते हैं कि योजनाएं बाजार अर्थव्यवस्था के लिए नवाचार और उद्यमशीलता की भावना को आगे नहीं बढ़ने देती हैं। लेकिन योजना के माध्यम से, चीन एक अधिक जीवंत और नवीन बाजार अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकता है।
आज से 40 साल पहले की चीनी अर्थव्यवस्था पर नजर डालें, तब चीन में दुर्लभता की अर्थव्यवस्था थी, यानी देश में कुछ भी उपलब्ध नहीं था। अगर आपको चावल या रोटी खरीदना होता था तो भी आपको राशन कूपन लेना पड़ता था। उस पुरानी नियोजित अर्थव्यवस्था में ऐसा कुछ भी नहीं था जो लोग पैसे होने पर भी खरीद सकें। यह और बात है कि तब लोगों के पास पैसा कम था।
लेकिन अगले चार दशकों तक देश ने परिवर्तन का दौर देखा। चीन में धीरे-धीरे बहुराष्ट्रीय कंपनियां आने लगीं, जिसने 1980 और 1990 के दशक में देश की अर्थव्यवस्था को बदल कर रख दिया। अब, चीन की “पारिस्थितिक सभ्यता” नीति जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर स्थानांतरित कर रही है, और हरित वित्त के माध्यम से प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा दे रही है।
दरअसल, चीन की पंचवर्षीय योजना प्रणाली आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के दीर्घकालिक मूल्यांकन पर जोर देती है, जिससे लोगों और व्यवसायों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। यह केंद्रीकृत और एकीकृत राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास कार्यक्रम है। चीन की योजना प्रक्रिया किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं अधिक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाती है। वैसे भी, चीनी लोगों की पारंपरिक सोच कन्फ्यूशियस दर्शन, ताओवाद, बौद्ध धर्म और सार्वभौमिक कानूनों से जुड़ी है जो योजना में एक सांस्कृतिक रस हमेशा बना रहता है। व्यापक जनता के दीर्घकालिक विचार उन राजनेताओं की अल्पकालिक व्यक्तिगत जरूरतों पर भारी पड़ते हैं जो व्यक्तिगत लाभ या धन प्राप्त करना चाहते हैं, जैसा कि हम आज अमेरिका में देख रहे हैं।
अमेरिका में जहां कोविड-19 महामारी से लोगों का स्वास्थ्य और जीवन प्रभावित हुआ है, साथ ही अर्थव्यवस्था की हालत भी खस्ता हो गई है, फिर भी अल्पकालिक राजनीतिक हितों के लिए उन समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है। वहां आर्थिक स्वास्थ्य और लोगों की आजीविका राजनीतिक शक्ति की प्राथमिकताओं में गौण है।
इस समय हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहां वैश्वीकरण-रोधी भावनाएं बढ़ रही हैं। वास्तव में, हम एक द्विपक्षीय दुनिया की ओर देख रहे हैं, जहां एक तरफ अमेरिका और अन्य देश हैं जिन्होंने संरक्षणवाद और एकतरफावाद का सहारा लिया है, और दूसरी तरफ चीन के साथ-साथ बहुपक्षीय वातावरण चाहने वाले अन्य देश हैं। जाहिर है, चीन अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना में नए वैश्विक वातावरण को ध्यान में रखेगा।
चीन अब वैश्वीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान देने लगा है। घरेलू खपत को बढ़ावा देने और घरेलू बाजार को और विकसित करने पर उसका फोकस है। चीन को चाहिए कि वह अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में अधिक परिवर्तन और एक तेज नवाचार रणनीति अपनाये। 
हालांकि, यह शुरुआती दौर में चुनौतीपूर्ण हो सकता है लेकिन लंबे समय में इसका फायदा देश को मिलेगा। इस प्रकार, उच्च-स्तरीय विनिर्माण, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार को स्थानीय बनाने पर ध्यान देना चीन की आगामी 14वीं पंचवर्षीय योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके अलावा, जन-जीवन, शिक्षा, चिकित्सा व स्वास्थ्य, मकान आदि विषयों पर भी ध्यान रहेगा। 
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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