बस स्टैंड की व्यवस्था में नहीं बची मानवा, लाचार की हो रही अनदेखी

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बरनाला : 35 साल पहले नगर सुधार ट्रस्ट के अधीन बनाए गए जरनल जत्थेदार करतार सिंह जोशिला के नाम से बस स्टैंड में आज तक असमर्थ, दिव्यांग व बुजुर्ग को सहारा नहीं मिल पा रहा है। बेशक इस बस स्टैंड से विभिन्न ठेका सिस्टम से ट्रस्ट लाखों की कमाई कर अपना खजाना भर रहा है, परंतु इसमें न तो रैंप है आर न ही व्हीलचेयर तथा स्ट्रेचर की सुविधा है। असमर्थ लोगों को अपनों व छड़ी का सहारा लेना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शनिवार को करीब 200 बुजुर्ग बस स्टैंड में अपने अपने घरों से इलाज के लिए दवा से लेकर अन्य कामकाज के लिए बरनाला पहुंचा, लेकिन उनको सहारा देने की बात तो दूर अन्य सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। ताजोके निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग बूटा सिंह को तपा की बस चढ़ने के लिए जब बस काउंटर पर पहुंचे तो उसको बैठने के लिए सीट नहीं मिली। जब उसने टेबल पर बैठे युवकों को विनती की तो उनमें से कोई भी अपनी सीट से नहीं उठे, जिसके बाद बुजुर्गों को अपना और रास्ता ढूंढना पड़ा। आंखों की कम रोशनी व कम सुनने की समस्या से पीड़ित 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला सिंदरपाल कौर को पक्खो कैचियां की बस में सवार होने के लिए बस स्टैंड के मुख्य गेट से लड़खड़ाते छड़ी का सहारा लेकर 100 मीटर तक आना पड़ा। इस दौरान न तो उसको अपनो व न ही राहगीरों का सहारा मिला, बस बुजुर्ग महिला को छड़ी का सहारा लेकर ही बस काउंटर पहुंचना पड़ा।
बस स्टैंड का एक गेट बंद होने के कारण दो फीट के गेट से घुटनों की समस्या के कारण 45 वर्षीय जसवीर सिंह निवासी राड़ा जिला मानसा को सीढ़ी चढ़ते भीड़ के धक्के का सामना करना पड़ा। इस दौरान वह लड़खड़ाते हुए गिरने से बाल-बाल बच गए। ऐसे में उसको सहारा देने वाला कोई भी आगे नहीं बढ़ा।
कैंसर से लड़ रही बरनाला निवासी महिला सपना को दूसरे शहर से जांच के बाद बस स्टैंड से लेकर आने में अपनों का सहारा लेना पड़ा। चलने फिरने में असमर्थ सपना को उसकी बेटी प्रिया व युवक ऋषि ने सहारा देकर ले गए। ऐसे में न तो कोई व्हीलचेयर व न ही स्ट्रेचर मिला, जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरा सीढ़ी चढ़ते समस्या बढ़ गई।
बरनाला से बाजाखाना तक जाने वाली बस काउंटर पर 80 वर्षीय हरदीप कौर बस चढ़ने के लिए काउंटर की ऊंचाई पार करते संतुलन खोने से लड़खड़ाते गिर गई व दोबारा खड़े होते लड़खड़ाते बस का सहारा लेकर बस चढ़ पाई। इसी प्रकार भदौड़ जाने के लिए 85 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतम सिंह को ना व्हीलचेयर, ना स्ट्रेचर व न ही छड़ी होने के कारण खुद ही लड़खड़ाते 10 मीटर की दूरी 10 मिनट में तय करके बस चढ़ना पड़ा, इस दौरान काफी परेशानी झेलनी पड़ी। 80 वर्षीय हाकम सिंह आखों की कम रोशनी व कम सुनने की समस्या से पीडि़त राईया जाने के लिए बस स्टैंड पर रेंगते हुए बस काउंटर पर पहुंच पाए। इस दौरान उसको न तो किसी कंडक्टर न और न ही किसी राहगीर व कर्मचारी ने उनकी मदद की। इसी प्रकार दो वक्त की रोटी के लिए विभिन्न बसों से रुपया मांगने वाली आंखो की कम रोशनी व कम सुनाई देने से पीडि़त बुजुर्ग महिला को भी छड़ी के सहारे ही अपना रास्ता ढूंढते देखा गया, जो एक कदम चलने से पहले छड़ी की आंख से देख दूसरा कदम रखती है।
पा निवासी बिट्टू जोकि 10 साल पहले बस के नीचे टांग आने से दिव्यांग हैं व नकली टांग का सहारे छड़ी पकड़ बस स्टैंड में चलते पाए गए। इस दौरान टांग में दर्द के कारण बीच-बीच में आराम करता रहा व धीरे-धीरे खुद के सहारे ही तपा बस काउंटर तक पहुंचना पड़ा। जल्द बेहतर सुविधा का प्रयास किया जाएगा : ईओ
नगर सुधार ट्रस्ट के ईओ रविंदर कुमार ने बताया कि उनकी तरफ से व्हीलचेयर, स्ट्रेचर व रैंप को लेकर जल्द ही योजना बनाई जाएगी। इस सुविधाओं को मुहैया करवाने के लिए जो भी ग्रांट पास होगी उससे बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जाएगा।