पाक को मिली थोड़ी राहत, आतंकवादी हमलों में आई थोड़ी गिरावट लेकिन ‘खतरे से बाहर नहीं’

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गुजरांवालाः पाकिस्तान में बीते दशक में आतंकवादी हमलों में 85 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है, जो देश के लिए एक स्वागत योग्य आंकड़ा है। हालांकि आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के पाकिस्तान के प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय चिंता और भविष्य में पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ शांति समझौते को लेकर जोखिम बना हुआ है। पाकिस्तान थिंक टैंकों ने मिलकर यह आंकड़ा एकत्रित किया है। उन्होंने पाया कि 2009 में आतंकवादी हमलों का आंकड़ा करीब 2,000 से 2019 में गिरकर 250 हो गया जो बेहद तेज गिरावट है और आतंकवादी हमलों के खिलाफ लंबी लड़ाई को दिखाता है।

हालांकि, पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था ने अक्टूबर में कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। यह समूह पाकिस्तान को ‘‘ग्रे’’ सूची से ईरान और उत्तर कोरिया के साथ ‘‘काली’’ सूची में डालने पर विचार के लिए अगले महीने बैठक करेगा। यह कदम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है।

अमेरिका स्थित विल्सन सेंटर में एशिया प्रोग्राम के उप निदेशक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ‘‘आतंकवादी हिंसा के मामलों में तेज गिरावट 2014 में नजर आनी शुरू हुई थी, जो काफी उल्लेखनीय है।’’ हालांकि उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘पाकिस्तान अभी खतरे से बाहर नहीं है। आतंकवाद के मद में धन मुहैया कराने वालों की निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पिछले साल कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को धन मुहैया कराने और धन शोधन पर रोकथाम के 40 उपायों की सूची में से सिर्फ एक को पूरी तरह से लागू किया है।
 

पाकिस्तान के आतंकवादी समूहों का संबंध अक्सर अफगानिस्तान में सीमा पार के समूहों से जोड़ा जाता है। इसलिए आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने में इसकी प्रगति ऐसे समय में अहम हो जाती है, जब विशेषकर अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अपनी 18 साल पुरानी लड़ाई को खत्म करना चाहता है।

अन्य 39 उपायों को इससे पहले आंशिक रूप से लागू किया गया था या कुछ मामलों में उन्हें बिल्कुल नजरअंदाज किया गया था। अगर पाकिस्तान को काली सूची में डाला जाता है तो हर वित्तीय लेन देन पर कड़ी नजर रखी जाएगी और देश के साथ कारोबार करना महंगा एवं जटिल हो जाएगा।