पाकिस्तान में सिखों की शीर्ष संस्था ETPB ने करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने के फैसले का किया स्वागत

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लाहौर : पाकिस्तान में सिखों की शीर्ष संस्था एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने करतारपुर गलियारा फिर से खोलने के भारत सरकार के फैसले का मंगलवार को स्वागत किया और कहा कि इससे भारतीय सिखों को गुरुद्वारा दरबार साहिब की निर्बाध यात्र करने में मदद मिलेगी। भारत ने बुधवार से करतारपुर गलियारा फिर से खोलने की मंगलवार को घोषणा की। यह गलियारा, पाकिस्ता स्थित दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है। 

दरबार साहिब में ही सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताये थे। कोविड-19 महामारी के चलते मार्च 2020 से स्थगित तीर्थयात्र को फिर से शुरू करने की घोषणा शुक्रवार को मनाई जाने वाली गुरुनानक जयंती से तीन दिन पहले की गई। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रधान सरदार अमीर सिंह ने कहा, ‘‘हम भारत सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं, जो काफी पहले ले लिया जाना चाहिए था। यह फैसला भारत के पंजाब से सिखों को उस स्थान की यात्र करने का अवसर प्रदान करेगा जहां बाबा नानक ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताये थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान में पवित्र स्थलों पर आना सिखों का मूल अधिकार है।’’ उन्होंने कहा कि गलियारे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

सिंह ने कहा, ‘‘यहां से प्रेम और सौहाद्र्र का एक संदेश जाना चाहिए। इससे तनाव घटाने और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर करने में मदद मिलेगी। ’’ सिंह ने कहा कि पाकिस्तानी सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति गुरु नानक जयंती के सिलसिले में बुधवार को यहां करीब 3,000 सिखों की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत से इतनी ही संख्या में श्रद्धालुओं का गलियारे से आना सुगम कर सकते हैं।’’उन्होंने कहा कि गलियारा एक दिनों दोनों देशों के लोगों को करीब ले आएगा। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धाíमक स्थलों की देखरेख करने वाले ईटीबीपी ने भी गलियारा फिर से खोले जाने का स्वागत किया। इसके प्रवक्ता अमीर हाशमी ने कहा कि भारत से वाघा सीमा होते हुए बुधवार को करीब 3,000 सिख पाकिस्तान आएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यक्रम 18 नवंबर को गुरुद्वारा जन्मस्थान ननकाना साहिब में होगा। 

 



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