HomeTrendingपत्रकारों के ख़िलाफ़ इतनी एफ़आईआर यूपी में क्यों

पत्रकारों के ख़िलाफ़ इतनी एफ़आईआर यूपी में क्यों


  • समीरात्मज मिश्र
  • बीबीसी हिंदी के लिए लखनऊ से

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

हाथरस में केरल के एक पत्रकार के ख़िलाफ़ लगे राजद्रोह के मामले और फिर उनकी गिरफ़्तारी के बाद यूपी में यह चर्चा एक बार फिर चल रही है कि योगी सरकार पत्रकारों से इतनी नाराज़ क्यों रहती है?

उन मुक़दमों की बातें होने लगी हैं जो कथित तौर पर शासन-प्रशासन की आलोचना करने के जुर्म में पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज की गई थीं. इन मुक़दमों के बाद कई पत्रकारों की गिरफ़्तारियाँ भी हुई थीं, जिन्हें कुछ समय हिरासत में रहने के बाद ज़मानत भी मिल गई थी लेकिन उनके ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे जारी हैं.

कभी पत्रकार रह चुके और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी कहते हैं कि “पत्रकारों को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास होना चाहिए.”

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योगी आदित्यनाथ के साथ उनके मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी

एक न्यूज़ वेबसाइट की कार्यकारी संपादक के साथ क्या हुआ

इसी वर्ष जून के महीने में लॉकडाउन के दौरान एक न्यूज़ वेबसाइट की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा और वेबसाइट की मुख्य संपादक के ख़िलाफ़ वाराणसी पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की थी.



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