निर्भया केस / दोषी मुकेश के वकील ने दिल्ली की अदालत में अपील दायर की, कहा- मेरा मुवक्किल घटनास्थल पर मौजूद नहीं था

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  • निर्भया केस के चारों दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी दी जानी है
  • कानूनी विकल्प बचे होने के कारण फांसी की तारीख तीन बार टाली जा चुकी है

नई दिल्लीनिर्भया के चारों गुनहगारों को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी दी जानी है। इससे बचने के लिए सभी दोषी अलग-अलग कानूनी दावपेंच इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को एक दोषी मुकेश सिंह के वकील एमएल शर्मा ने दिल्ली की एक अदालत में अपील दायर की। इसमें कहा गया है कि मुकेश तो घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था। वकील का यह भी आरोप है कि मुकेश को जेल में प्रताड़ित किया गया।

इस महीने की शुरुआत में दिल्ली की कोर्ट ने चारों गुनहगारों मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय सिंह (31) को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी देने का वॉरंट जारी किया था। इसके पहले तीन बार फांसी टल चुकी है।

दावा- राजस्थान से गिरफ्तार हुआ था मुकेश
वकील शर्मा ने मंगलवार को अदालत में दायर अपील में दावा किया कि मुकेश को 17 दिसंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। अपराध के वक्त तो वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। अपील में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुकेश को तिहाड़ जेल में टॉर्चर भी किया गया।

जल्लाद को बुलाया
तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी शुरू कर दी है। जेल अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी पवन जल्लाद को फांसी देने के दिन से तीन दिन पहले यानी 17 मार्च को तिहाड़ जेल आकर रिपोर्ट करने को कहा है। पवन के आने के बाद अधिकारी एक बार फिर डमी फांसी देकर टेस्टिंग करेंगे।

16 दिसंबर 2012: 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी
दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 16 दिसंबर, 2012 की रात 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों… राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।