धनेर ने किया आत्मसर्मपण, अदालत ने भेजा जेल, किसानों ने किया रोष प्रदर्शन

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सूत्र, बरनाला : 29 जुलाई 1997 को हुए किरणजीत कत्ल कांड को लेकर संघर्ष कमेटी के नेता मनजीत धनेर को तीन सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल उम्र कैद की सजा के चार सप्ताह बाद सेशन कोर्ट में जज अरुण गुप्ता की अदालत में पेश होने के दिए आदेशानुसार उमक्रैद की सजा बहाल का विरोध करते हुए किरणजीत कांड संघर्ष कमेटी के नेता मनजीत धनेर द्वारा सोमवार को अनाज मंडी बरनाला से शहर के विभिन्न बाजारों से हजारों किसानों के साथ रैली कर रोष मार्च के बाद जिला प्रबंधकीय परिसर में धरना लगाने के बाद दोपहर करीब तीन बजे अपने वकील जगजीत सिंह ढिल्लों की हाजिरी में आत्मसमर्पण कर दिया व अदालत द्वारा उमक्रैद की सजा बहाली व सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जिला जेल बरनाला में भेजा गया।

इस मौके किसानों को संबोधित करते हुए कहा मामले में आरोपितों के खिलाफ आवाज उठाई व आरोपितों पर केस दर्ज करवाया गया। परंतु वह खेतों व गांव में शरेआम घूमते रहे, जिसके बाद उन्होने अदालत में उक्त मामले में उमक्रैद की सजा दिलाई। 85 वर्षीय दलीप सिंह को भीड़ द्वारा उक्त मामले में आरोपित होने के लोगों ने पीटा था। राजनीतिक दबाव व पुलिस ने झूठे केस दर्ज किया। सरकार व पुलिस उनको संघर्ष से नहीं रोक सकती। वह इसी प्रकार होने वाले अत्याचार का विरोध करेंगे। इस मौके पर उनहोंने कहा, जेलां साडे लई कॉलेज हुंदियां ने, मै जेल विच्च इक होर डिगरी करके आउंगा, ते फिर संघर्ष करूंगा। परिवार के साथ आए मंजीत धनेर

मनजीत धनेर सोमवार को जिला प्रबंधकीय परिसर में पुत्र वधु प्रदीप कौर, पौत्र गुरशरण सिंह, पोती रवनीत कौर, बेटी दविदर कौर, दोहता दोहती गुरलीन कौर व गुरकीरत के साथ पहुंचे थे। लेकिन अदालत में आत्मसमर्पण के बाद जेल चले गए।

-क्माया है मामला-

12वीं कक्षा की छात्रा किरणजीत कौर से 29 जुलाई 1997 को पढ़ने दौरान गायब हो गई, जिसकी शव एक सप्ताह बाद महलकलां के नजदीकी किसी खेत में दफनाई हुई पाई गई। जिसकी तलाश के बाद उसका पोस्टमार्टम करवाया गया, तो दुष्कर्म की घटना सामने आई। दुष्कर्म की घटना के एक सप्ताह बीच 3 अगस्त 1997 को पुलिस ने संघर्ष के बाद 7 लोगों को किरणजीत कौर को अगवा करके दुष्कर्म कर हत्या करने व शव को खुर्द बुर्द करने के मामले में केस दर्ज किया। जिसके बाद उक्त कांड में अदालत द्वारा चार आरोपितों को उमक्रैद की सजा सुनाई गई। केस के दौरान तीन मार्च 2001 में आरोपित पक्ष से संबंधित 85 वर्षीय दलीप सिंह अदालत में दोनों पक्षों में हुई झड़प के दौरान घायल हो गया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने उक्त हत्या मामले में सुनवाई दौरान सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन 24 अगस्त 2007 को पंजाब के राज्यपाल ने किसान नेता मनजीत धनेर, नारायण दत्त व मास्टर प्रेम की सजा रद्द कर दी, परंतु आरोपित पक्ष ने इस फैसले का विरोध किया व हाईकोर्ट में अपील पर 11 फरवरी 2008 को सुनवाई दौरान नारायण दत्त व मास्टर प्रेम को बा-इज्जत बरी करते किसान नेता मनजीत धनेर को उम्रकैद की सजा सुना दी। किसान संगठन बचान के लिए कर रहे संषर्घफैसले का विरोध करते किसान संगठनों द्वारा मनजीत धनेर के हक में सैशन कोर्ट, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सजा रद्द की मांग की, परंतु 3 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने उमक्रैद बहाल रखी व 30 सितंबर को उसको जिला जेल बरनाला भेज दिया।