खराब प्रबंधन के चले मनाल गोशाला में रोजाना मर रहे दो पशु

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राज्य सरकार द्वारा गली मोहल्लो नेशनल हाईवे मुख्य सड़कों गोशाला ही हालत बदहाल।
बरनाला : राज्य सरकार द्वारा गली मोहल्लो, नेशनल हाईवे, मुख्य सड़कों, लिक रोड घूम रहे बेसहारा पशुओं को सहारा देने के लिए हर जिले में सरकारी कैटल पाउंड का निर्माण करने के लिए लाखों की ग्रांट प्रदान की, ताकि बेसहारा पशुओं को सहारा मिल सकें। लेकिन जिला प्रशासन, नगर कौंसिल व कैटल पाउंड प्रबंधकों की लापरवाही के कारण बेसहारा पशु सरकारी कैटल पाउंड में ही मौत का शिकार हो रहा है। गत माह से बारिश के कारण गिर रहे तापमान व रात के घने कोहरा के कारण सर्दी व शीत लहर से बचाव को लेकर बेसहारा पशुओं के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए है। सर्दी के कहर के कारण बेसहारा पशु मौत का शिकार बन रहे है। जिसकी उदाहरण कस्बा हंडिआया में नगर कौंसिल के कैटल पाउंड़ के फेल सिस्टम व अधिकारियों की अनदेखी के कारण प्रतिदिन मौत का शिकार बन रहे दो बेसहारा पशु है। बता दें कि इस गोशाला में शुरुआत में 220 बेसहारा पशुओं थे, लेकिन अब प्रतिदिन मौत का शिकार हो रहे बेसहारा पशुओं से करीब 62 बेसहारा पशु ही शेष बचे है व हर दिन दो बेसहारा पशु सर्दी के कारण मर रहे है।
घने कोहरे, 10 डिग्री तापमान व शीत लहर से बचाव के लिए जिला प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार का प्रबंध नही किया गया। बेसहारा पशुओं द्वारा किया जा रहा मलवा समय पर न उठाने के कारण वह पर जमा मलवे के कारण बेसहारा पशु उसमें फंस गिर रहे है व चोटिल हो रहे है। बेसहारा पशुओं को जरुरत के हिसाब से हरा चारा व सर्दी से बचाव को गुड़ मुहैया नही हो रहा है, जिस कारण बेसहारा पशु आधे भूखे रह रहे है व पराली से ही काम चला रहे है। कमजोर पशुओं के लिए इलाज के लिए जहां दवा की कमी चल रही है। जिस कारण वहां बेसहारा पशु अपने इलाज से वंचित नजर आ रहे है व प्रतिदिन सर्दी व इलाज की कमी के कारण मौत का शिकार हो रहे है। गांव गांव मनाल में 13 एकड़ में बनाई गए मनाल कैटल पौंड की शुरुआत में 1300 पशुओं को छोड़ा गया था। वहां पर अभी तक न तो सर्दी व गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए उचित प्रबंध, साफ सफाई व पशुओं के मलवे का प्रबंध, पशुओं के लिए पक्के फर्श का प्रबंध, ना प्रयाप्त में फीड, ना ही चार दीवारी, ना ही रात को लाइट प्रबंध, ना गो रक्षकों को कमरा, ना ही तूड़ी की संभाल के लिए शैड सहित अन्य प्रबंध किए गए है, जिस कारण मलवे से गाद जमा होने से बेसहारा पशु फंस करके गिर रहे है व बीमार पशु अपना दम तोड़ रहै है। बेसहारा पशुओं की संभाल के लिए सेवादारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। सर्दी के कारण हर दूसरे तीसरे दिन एक बेसहारा पशु मौत का शिकार हो रहा है। हर साल सूल होता है लाखों का कर
कैप्टन सरकार हर वर्ष इन वस्तुओं जिसमें चार पहिया वाहन पर 1000, एसी हाल की बुकिग पर 1000, बिना एसी हाल की बुकिग पर 500, दो पहिया वाहन पर 500 रुपये वसूल किए जाते हैं। इसके अलावा 100 रूपये तेल के टैंकर पर, दो पैसे बिजली यूनिट पर, एक फीसद सीमेंट पर, 10 रुपये इंडियन मेड व पांच रुपये पंजाब मीडियम फॉरिग्न पर लगाकर करोड़ों रुपये खजाने में भर हजम कर लिए जाते है, एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 100 करोड़ के करीब सेस इकट्ठा होता है। नहीं मिल पा रहा जरूरत के हिसाब से चारा
एक अनुमान के अनुसार एक पशु को प्रतिदिन करीब तीन किलो फीड व एक हजार संख्या में शामिल बेसहारा पशुओं के लिए ती क्विंटल फीड की जरूरत होती है, लेकिन मनाल में केवल पूरे माह में एक हजार किलो फीड ही मिल पाती है, लेकिन जरूरत 5 हजार फीड की है, जो उनके लिए बहुत कम है।
ईओ सतीश गर्ग ने कहा कि उनकी तरफ से दौरा करके जरुरत के सामान व पुख्ता प्रबंधो का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।