कोरोना की महामारी के चलते इस बार श्री रामनवमी शोभायात्रा का आयोजन नही

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कोरोना एक विश्व स्तरीय ऐसी महामारी है, जिसने पूरे विश्व को आहत ही नहीं किया है बल्किऐसा भय भी व्याप्त कर दिया है जिसके शीघ्र समाप्त होने का कोई रास्ता ही दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसा नहीं है कि इससे पहले कभी कोई महामारी विश्व ने नहीं देखी, कभी प्लेग, कभी चेचक, कभी टीबी, कभी चिकनगुनिया, कभी  पोलियो, कभी डेंगू तो कभी कैंसर ने समाज को परेशान भी किया, भयभीत भी किया तथा मानवता का बहुत बड़ा नुक्सानभी किया। जब प्लेग अथवा चेचक की शुरुआत हुई तो हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई बार तो पूरे के पूरे गांव भी तबाह हुए परन्तु तब विज्ञान अभी इतना विकसित नहीं था लेकिन आज ऐसा नहीं, आज विज्ञान बहुत तरक्की कर चुका है आज प्लेग तथा चेचक को तो लोग भूल ही चुके हैं तथा टीबी, डेंगू एवं पोलियो पर भी किसी हद तक नियंत्रण पाया जा चुका है और कैंसर पर भी आंशिक रूप से नियंत्रण हो चुका है।
प्लेग तथा चेचक को तो मैंने भी निकट से नहीं देखा, लेकिन टीबी, स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, पोलियो, काला पीलिया का इतिहास तो मेरे सामने है। इन सबका उतना डर कभी नहीं था जितना कि इस वक्त पूरी दुनिया में कोरोना का है। इसका कारण है कि कोरोना जितनी जल्दी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में दाखिल होता है, उतनी जल्दी कोई भी वायरस एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता था। पहले जितने भी वायरस थे वे इस तरह से तेजी के साथ पूरे विश्व में नहीं फैले, जितनी तेजी से यह कोरोना वायरस फैल रहा है।
मेरे जीवन में मैंने इससे पहले कभी नहीं देखा कि किसी महामारी के चलते कुछ देशों की सरकारों ने पूरे राष्ट्र में कर्फ्यू जैसे हालात घोषित किए हों तथा दूसरे देशों के नागरिकों का प्रवेश बंद कर दिया हो। इससे पहले मैंने कभी भी नहीं देखा कि किसी महामारी के कारण भारत के बड़े पवित्र तथा ऐतिहासिक धार्मिक स्थान बंद कर दिए गए हों। इससे पहले मैंने कभी नहीं देखा कि उत्तर, दक्षिण, पूर्व तथा पश्चिम के सभी बड़े धार्मिक स्थानों के द्वार भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हों। आज सिद्धि विनायक, शिरडी दरबार, शनि शिंगनापुर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, वृंदावन के सुप्रसिद्ध मंदिर, मां चिंतपूर्णी तथा मां वैष्णो देवी के दरबार तक भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इससे स्पष्ट महसूस किया जा सकता है कि स्थिति कितनी विस्फोटक है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह सब उस वक्त हुआ है जब पूरा देश श्री रामनवमी तथा मां के नवरात्रों के आयोजन की श्रद्धापूर्वक तैयारी कर रहा है। यह सब उस वक्त हुआ है जब श्रीराम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद पहली बार राष्ट्र भगवान श्रीराम का प्रकटोत्सव मनाने जा रहा है। हम पंजाब वासी भी बहुत उत्साहित हैं तथा इस वर्ष श्री रामनवमी को हम पहले से ज्यादा हर्ष तथा उल्लास के साथ मनाना चाहते हैं। जालंधर स्थित शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर ने भी श्री रामनवमी का उत्सव मनाने की पूरी तैयारी कर रखी है।
मैं श्री देवी तालाब मंदिर का मुख्य सेवादार हूं तथा हर वर्ष श्री देवी तालाब मंदिर प्रबंधक कमेटी की ओर से श्री रामनवमी के अवसर पर एक भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया जाता है। हमारी प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों तथा सदस्यों ने इस वर्ष भी शोभा यात्रा की पूरी तैयारी कर रखी है, बल्किमुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि इस वर्ष हमने पहले वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा तैयारी कर रखी है, लेकिन जो हालात कोरोना के कारण देश में बन चुके हैं, ऐसे में हमारी कमेटी के सब सदस्य महसूस करते हैं कि प्रत्येक भारतीय की जान बचाना हर भारतीय की पहली जिम्मेदारी बन गया है। भगवान तो केवल मंदिर में नहीं रहते बल्किहम सब के दिलों में भी रहते हैं, भगवान तो कभी भी नहीं चाहेंगे के हम उनके भक्तों की जान को जोखिम में डाल कर उनका जन्मोत्सव मनाएं। विज्ञान कह रहा है कि आज आवश्यकता है कि हम एक-दूसरे के साथ हाथ भी न मिलाएं तथा एक-दूसरे से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखें। ऐसे में शोभा यात्रा का आयोजन करना शायद भगवान के भक्तों को मुसीबत में डालने के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होगा। श्री रामनवमी तो अगले वर्ष फिर भी आएगी, लेकिन अगर भारी भीड़ के कारण कुछ लोग कोरोना से संक्रमित हो गए या कुछ जानें चली गईं तो वो लोग कभी लौटकर नहीं आएंगे जो काल के गाल में समा जाएंगे। और अगर ऐसा कुछ हुआ तो हम कभी भी स्वयं को माफनहीं कर पाएंगे तथा भगवान श्रीराम भी हमें कभी माफनहीं करेंगे इसलिए हमने यह निर्णय लिया है कि इस बार हम श्री रामनवमी की शोभा यात्रा का आयोजन नहीं करेंगे। जालंधर सहित पंजाब के कई शहरों से कई श्रीराम भक्तों तथा मां के लाडलों ने भी लिखित तथा मौखिक रूप से शोभा यात्रा का आयोजन न करने का सुझाव दिया है, हम उनका भी आभार व्यक्त करते हैं तथा इसे भगवान श्रीराम एवं श्री देवी तालाब मंदिर में विराजमान मां का भी आदेश मानते हैं और इसीलिए शोभा यात्रा आयोजित नहीं करने का यह निर्णय लिया गया है।
हम विचार कर रहे हैं कि अगर संभव हो सका तो प्रतीकात्मक रूप से श्री देवी तालाब की परिक्रमा में ही भगवान की पालकी की शोभा यात्रा का आयोजन करें लेकिन अगर हुआ तो उसे पूरी सतर्कता के साथ किया जाएगा, मास्क तथा सैनेटाइजर का मुकम्मल इंतजाम किया जाएगा, परिक्र मा करने वालों की पहले कोरोना स्क्रीनिंग की जाएगी तथा साथ चलने वाले सीमित श्रीराम भक्त एक-दूसरे से एक मीटर की दूरी बनाकर रखें, इस बात का ध्यान रखा जाएगा। हमें इस बात का दु:ख नहीं है कि शोभा यात्रा की पूरी तैयारी होने के बावजूद हमें शोभा यात्रा का आयोजन रद्द करना पड़ रहा है। हमें इस बात का भी आभास है कि जो लोग शोभा यात्रा में शामिल होते हैं, जो कलाकार भाग लेते हैं, जो कारीगर झांकियां तैयार करते हैं, जो बैंड-बाजे, घोड़ी-रथ वाले तथा वाहन वाले भी बेसब्री से शोभा यात्रा का इंतजार कर रहे थे, उन्हें निराशा अवश्य होगी लेकिन वे सब यह न भूलें कि इंसानियत को किसी भी कीमत पर खतरे में नहीं डाला जा सकता। मैं भरे मन के साथ यह कह रहा हूं कि प्रभु की कृपा से अब शोभा यात्रा अगले वर्ष ही निकलेगी। एक प्रार्थना भी आप सबसे कि आज से बल्किअभी से यह प्रार्थना कीजिए कि यह आफत जल्दी से जल्दी समाप्त हो, इसका इलाज तुरंत मिले तथा अब एक भी जान न जाए