केपी शर्मा ओली को हराकर माधव कुमार बने कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन

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माधव कुमार नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन बन गए हैं. (फोटो साभार-News18 English)

माधव कुमार नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन बन गए हैं. (फोटो साभार-News18 English)

Madhav Kumar Nepal replaces PM KP Oli: कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नारायण काजी श्रेष्‍ठ ने बताया कि केंद्रीय समिति के 315 सदस्‍यों ने माधव कुमार नेपाल के पक्ष में मतदान किया.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 22, 2020, 7:35 PM IST

काठमांडू. नेपाल (Nepal) की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (Communist Party) के नेतृत्‍व में मंगलवार को बड़ा बदलाव हुआ. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की जगह अब माधव कुमार नेपाल (Madhav Kumar Nepal) पार्टी के चेयरमैन बन गए हैं. कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नारायण काजी श्रेष्‍ठ ने बताया कि केंद्रीय समिति के 315 सदस्‍यों ने माधव के पक्ष में मतदान किया. बता दें कि अभी दो दिन पहले ही नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी (Bidya Devi Bhandari) ने संसद भंग कर चुनाव का ऐलान किया था. नेपाल में मध्यावधि चुनाव की तारीखों की घोषणा भी कर दी गई है. नेपाल में 30 अप्रैल 2021 और 10 मई 2021 को चुनाव होंगे और इसके बाद वहां नई सरकार का गठन किया जाएगा.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद भंग करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर गतिरोध की वजह से उनकी सरकार का कामकाज प्रभावित होने के कारण नया जनादेश लेने की जरूरत है. ओली ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को आश्चर्यचकित करते हुए रविवार को संसद भंग करने की सिफारिश कर दी और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई. ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच सत्ता के लिए लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच यह कदम उठाया गया.

केपी शर्मा ओली ने इस वजह से की थी संसद भंग
प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में कहा था कि उन्हें संसद भंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा और कहा कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बारे में पता चलने के बाद उन्होंने मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की. संसद भंग करने और मध्यावधि चुनावों की तारीख की घोषणा के अपने फैसले का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘चुनाव के जरिए नया जनादेश हासिल करने के लिए मुझे मजबूर होना पड़ा क्योंकि मेरी सरकार के खिलाफ कदम उठाए जा रहे थे, सही से काम नहीं करने दिया जा रहा था.’ओली ने कहा कि सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर गतिरोध से सरकार के कामकाज पर बुरा असर पड़ा. उन्होंने कहा, ‘निर्वाचित सरकार को किनारे कर दिया गया और इसके खिलाफ लामबंदी की गयी जिसके कारण मुझे संसद को भंग करने का फैसला करना पड़ा.’ ओली ने कहा, ‘विवाद पैदा कर जनादेश और लोगों की इच्छाओं के खिलाफ राष्ट्रीय राजनीति को अंतहीन और लक्ष्यहीन दिशा में ले जाया गया. इससे संसद का महत्व खत्म हो गया क्योंकि निर्वाचित सरकार को समर्थन नहीं बल्कि हमेशा विरोध और विवादों का सामना करना पड़ा.’

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