ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों के द्वारा खुली लूट, शिक्षक व बच्चे नहीं हैं ट्रेंड

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ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों के द्वारा खुली लूट है।हर घर मे लैपटॉप या कंप्यूटर नही है।मोबाइल फोन पर नज़र गडा कर बैठना पड्ता है।हर परिवार मे 2 या 3 बच्चे हैं।सब के लिये अलग व्यव्स्था करनी बड़ी मुश्किल है।22 मार्च से पूरा भारत बन्द है इसलिये किताबें किसी के पास नही है।अभिवावक पुरानी किताबें ले भी ले तो पाठ्यक्रम बदल गया।नया पाठ्यक्रम मिल नही पाता तो बच्चे कैसे पढ़े।इन्टरनेट भी बहुत धीरे चलता है तो ढंग से ना तो आवाज आती है और नाही कुछ समझ मे  आता है।उसकी एवज मे अध्यापक ऑनलाइन वर्क शीट भेज देते हैं अब हर घर मे प्रिंटर नही है तो वो दी हुई वर्क शीट भी नही निकाल सकते।बड़े बच्चे तो ऑनलाइन क्लास ले सकते है परंतु छोटे बच्चे जो के स्कूल मे ठीक से बैठ नही पाते वो ऑनलाइन कैसे बैठेंगे और अगर उत्सुकतावश बैठ भी जाते है तो उनके समझ मे कुछ आता ही नही सिर्फ समय व्यतीत करते हैं।अध्यापकों को भी पाठ्यक्रम पूरा करने की इतनी जल्दी है के वो ये नही देख रहे के बच्चे समझ भी रहे है या नही।विशवविधाल्या की तरह या यूं कहें भाषणो की तरह पढाई करवाई जा रही है।कुछ स्कूल वाले तो अभिवाव्को पर दबाव बनाते है कि बच्चे स्कूल की निर्धारित वर्दी मे हो अब आप ही बताए के जब दुकाने ही बन्द है तो वर्दी भी कहा से लाएंगे।पांचवी कक्षा तक के बच्चे तो ऑनलाइन बामुश्किल पढ पाते हैं।उनकी ऑनलाइन पढाई तो सिर्फ 3 महीने की फीस वसूलने का ड्रामा भर है।मेरी माननीय शिक्षा मंत्री जी से अपील है कि वो निजी स्कूलों से कहे के वो किसी से भी तीन महीने की फीस ना ले ये पूरी तरह निरस्त हो।

संजीव बांसल