इन इस्लामिक स्कूलों में जंजीरों में बांध कर मारते हैं, छोटी कक्षाओं के स्टूडेंट्स का होता है रेप, जांच में हुआ खुलासा

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इन बच्चों में पांच साल तक के छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें 'खलवा' में शिक्षक बुरी तरह से जंजीरों में बांध देते हैं और पीटते हैं (सांकेतिक फोटो, News18 Kannada)

इन बच्चों में पांच साल तक के छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें ‘खलवा’ में शिक्षक बुरी तरह से जंजीरों में बांध देते हैं और पीटते हैं (सांकेतिक फोटो, News18 Kannada)

एक जांच (Investigation) ने स्कूलों में सिस्टम की नज़रों के सामने होने वाले बाल शोषण (Child Abuse) को उजागर किया है. ‘खलवा’ कहे जाने वाले इन स्कूलों में यौन शोषण (Sexual Harrasment) के सबूत भी मिले हैं. जांच में बड़ी कक्षाओं के स्टूडेंट्स के छोटी कक्षाओं के स्टूडेंट्स का रेप (Rape) और अन्य तरीकों से यौन उत्पीड़न करने की बात भी सामने आई है.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 25, 2020, 5:23 PM IST

पूरे सूडान (Sudan) के इस्लामिक स्कूलों (Islamic Schools) में हजारों लड़कों का शारीरिक और यौन शोषण (Sexual Harrasment) करने की खबर सामने आई है. एक नई डॉक्यूमेंट्री (Documentary) का खुलासा हुआ है. इससे पता चला है कि इन बच्चों का बड़ी कक्षाओं के बच्चे रेप (Rape) भी करते हैं. रिपोर्ट में सामने आया है कि पांच साल से कम उम्र के लड़कों को स्कूलों के प्रभारी धार्मिक पुरुष (religious men in charge) नियमित रूप से जंजीर में बांध कर रखने की सजा देते हैं और पीटते हैं. बता दें कि सूडान में ‘खलवा’ (Khalwas) कहे जाने वाले ऐसे स्कूलों की लगभग 30,000 है.

बीबीसी अरबी न्यूज की एक जांच (Investigation) ने स्कूलों में सिस्टम की नज़रों के सामने होने वाले बाल शोषण (Child Abuse) को उजागर किया है. ‘खलवा’ कहे जाने वाले इन स्कूलों में यौन शोषण (Sexual Harrasment) के सबूत भी मिले हैं. जांच में बड़ी कक्षाओं के स्टूडेंट्स के छोटी कक्षाओं के स्टूडेंट्स का रेप (Rape) और अन्य तरीकों से यौन उत्पीड़न करने की बात भी सामने आई है. बीबीसी अरबी न्यूज की यह जांच 18 महीने यानी करीब डेढ़ साल तक चली, जिसमें बच्चों के कई स्तरों पर शोषण (exploitation) का खुलासा हुआ.

दो स्टूडेंट्स पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री, पिटाई से हो सकती थी इनकी मौत
टीवी पर प्रसारत हुई बीबीसी अरबी न्यूज़ की पड़ताल में स्कूली बच्चों को जंजीरों में बंधा हुआ दिखाया गया है. जांच में खलवा कहे जाने वाले इस्लामिक स्कूलों में कुपोषित लड़कों को बहुत गंदे हालातों में रहते हुए पाया गया. जांच में यह भी पता चला कि यहां इन लड़कों को भीषण गर्मी में फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया जाता है. कुछ बच्चे जो बीमार होते हैं, उनका इलाज कराए बिना ही उन्हें, उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है.अंडरकवर रिपोर्टर और पूर्व खलवा छात्र फतेह अल-रहमान अल-हमदानी ने 18 महीने की अवधि में 23 खलवाओं के अंदर के माहौल को गुप्त रूप से फिल्माने के दौरान इन तथ्यों को उजागर किया. यह डॉक्यूमेंट्री दो लड़कों- मोहम्मद नादर और इस्माइल- की दुर्दशा पर केंद्रित है. इन दोनों को ही इतना पीटा गया था कि इनकी मौत भी हो सकती थी.

खलवा में बड़े छात्रों को जूनियर्स का रेप करते देखा
लड़कों को 5 दिनों तक बिना भोजन या पानी दिए खलवा के अंदर कैद और प्रताड़ित किया गया था और उन्हें उनके घावों में ‘टार’ रगड़ दिया था. मोहम्मद नादर ने कहा कि उन्होंने खलवा में बड़े छात्रों द्वारा जूनियर्स का बलात्कार करते लड़कों को देखा है. उन्होंने बताया, ‘खलवा के बारे में सबसे खराब बात बलात्कार है. वे आपकी इच्छा के विरुद्ध होते हैं.’

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जांच के दौरान अन्य खलवाओं में बलात्कार और यौन शोषण की रिपोर्ट आई
जांच के दौरान अन्य खलवाओं में भी बलात्कार और यौन शोषण की रिपोर्टें सामने आईं. एक फॉरेंसिक डॉक्टर, जिसने हाल ही में खलवा से बचकर निकले तीन लड़कों की जांच की थी, उसने बीबीसी को बताया कि लड़कों के साथ बार-बार बलात्कार किया गया था. जब उनसे पूछा गया था, “तुम्हारा बलात्कार कैसे किया गया?” उन्होंने बताया, “कभी-कभी हमारे परिवार हमसे मिलने आते हैं, आने से ठीक पहले हमसे बलात्कार किया जाता है.”

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