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इतिहास मे पहली बार रमजान के दिनों में घर पर नमाज करेंगे मुस्लिम, फेक न्यूज से भी निपटने का दिलाया भरोसा

नई दिल्ली। कोरोना ने सचमुच इतिहास बदल दिया है। एक तरफ जहां मंदिर, गिरिजाघर और मस्जिद में इबादत बंद है। वहीं पहली बार रमजान के दिनों में तरावीह (नमाज) घर पर ही पढ़ा जाएगा। वक्फ बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि देश के सभी बोर्ड ने कोई एकजुट फैसला लिया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से चर्चा के बाद सभी बोर्ड नेअपने तहत आने वाले लगभग सात लाख मस्जिदों और इबादतगाहों को इसका निर्देश दिया है। रमजान 24 अप्रैल से शुरू हो रहा है।

नकवी ने फेक न्यूज को लेकर किया सतर्क

कोरोना में शारीरिक दूरी को ध्यान मे रखते हुए यूं तो नकवी ने पहले ही इसकी तैयारी कर ली थी। गुरुवार को उन्होंने सभी से अफवाह फैलाने वाले फेक न्यूज को लेकर ज्यादा सतर्क किया। दरअसल पिछले दिनों विशेष कर मुस्लिम समुदाय के बीच इस तरह के संदेश फैलाए गए हैं कि आइसोलेशन सेंटर में उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।इसी कारण कुछ इलाकों में डाक्टरों पर लोगों ने पथराव भी किया।

मानसिक स्तर पर रहें सचेत

नकवी ने सभी वक्फ बोर्ड से अपील की कि वह नीचे तक पूरी स्पष्टता से यह संदेश पहुंचाएं कि स्वास्थ्यकर्मी, सुरक्षाबल, सफाईकर्मी सभी अपनी जान की परवाह छोड़कर हमारी चिंता कर रहे हैं। अगर किसी तरह का गलत संदेश सोशल मीडिया पर दिखता है तो तत्काल पुलिस के ध्यान मे लाएं ताकि वह उसका भंडाफोड़ कर सकें। बीमारी किसी संप्रदाय को देखकर उसे नहीं दबोचती है और सरकार जाति धर्म जाने बगैर बीमार को दुरुस्त करने में जुटी है। इसके लिए जरूरी है कि मानसिक स्तर पर सभी सचेत रहें और सामाजिक व राष्ट्रीय कर्तव्य को ध्यान में रखते हुए जरूरी दिशा निर्देशों का पालन करें।

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